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सरकार की निष्पक्ष शराब नीति पर पहले ही दिन से उठने लगे सवाल

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Mon, 02 Apr 2018 11:22 AM IST
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निष्पक्ष शराब नीति का दावा करने वाली जयराम सरकार की नई शराब नीति विवादों में आ गई है। जयराम सरकार ने विभिन्न जिलों में स्थित करीब आठ सौ शराब ठेकों की करीब छह सौ यूनिट बनाकर आवंटन के लिए नई व्यवस्था की।

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आवेदन मांगे गए और चिट के जरिये शराब ठेकों का आवंटन किया गया। पहली किस्त में आबकारी एवं कराधान विभाग ने करीब पचास करोड़ रुपये सिर्फ आवेदन शुल्क के नाम पर अर्जित कर लिए।

वहीं, आठ सौ करोड़ के ठेकों का आवंटन भी कर लिया, लेकिन कुछ महंगे और घाटे वाले शराब ठेकों के लिए एक भी आवेदन नहीं आया। इस पर विभाग ने शराब ठेके के मूल्य को कम कर दिया। रेट कम होने पर सोलन, शिमला समेत कई जगह शराब ठेकों के लिए कई ने आवेदन कर दिया। 

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अलाटमेंट निरस्त करने के बाद भी नहीं वापस किया आवेदन का पैसा

चिट में कई का नाम निकला तो आवंटित होने वाले आवेदक ने पांच प्रतिशत की सिक्योरिटी मनी तक जमा कर दी, लेकिन विभाग ने राजस्व घाटे की आशंका को देखते हुए आवंटित हो चुके ठेकों को निरस्त कर दिया। खास बात यह है कि चिट से आवंटन की प्रक्रिया को निरस्त करने के बावजूद विभाग ने किसी भी आवेदक को आवेदन की फीस वापस नहीं की।

वहीं, दोबारा आवेदन मंगाकर फिर से शराब ठेके आवंटित कर दिए। अब पहले आवंटित होने के बाद बिना बताए ही आवंटन निरस्त होने के बाद विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

इस संबंध में आबकारी एवं कराधान विभाग के प्रधान सचिव जगदीश चंद शर्मा से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह उपलब्ध नहीं हो सके। ठेके आवंटित होने के बावजूद निरस्त होने से नाराज आवेदकों ने विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से न्याय की गुहार लगाई है।
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