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काम के आधार पर मिलेगा एसडीएम को स्टाफ

ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 25 Jun 2014 10:45 PM IST
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हिमाचल मंत्रिमंडल ने उपमंडल, तहसील और सब तहसील स्तर पर नए स्टाफिंग पैटर्न को मंजूरी दी है। इसके तहत एसडीएम से लेकर तहसीलदार तक को इस आधार पर स्टाफ मिलेगा कि उनके यहां काम कितना है?
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यह सब डिविजन हैडक्वार्टर का है या रेवेन्यू या लाइसेंसिंग का काम कितना है? इस आधार पर ये पैटर्न तय हुआ है। तहसीलों और सब तहसीलों के लिए मानक ये है कि इनके तहत कितने पटवार सर्कल हैं और वहां काम कितना है?

इसमें ए, बी, सी के हिसाब से कैटेगिरी होगी। इसी कैटेगिरी के हिसाब से दफ्तर को स्टाफ मिलेगा। हर बार नए पदों की मंजूरी के लिए वित्त विभाग में नहीं जाना होगा। पैटर्न बनाने के लिए ये अध्ययन राज्य में 1989 के बाद अब हुआ है। इसके बाद मौजूदा स्टाफ का युक्तिकरण हो सकता है।
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट ने फैसला लिया है कि निजी भूमि पर उगे कचनार, पेपर मलबैरी, सफेदा, ओई, कीमू, चीमू और शहतूत के कटान पर ट्रांजिट पास की जरूरत नहीं होगी।

विभिन्न विभागों, बोर्डों तथा निगमों में अधीनस्थ लेखा सेवाएं (ओबी) के पदों को शामिल करने तथा भर्ती नियमों को एसएएस की विभिन्न श्रेणियों में शामिल करने और इनकी काडर संख्या को 219 पर निर्धारित करने का निर्णय लिया गया।

कृषि विभाग में विधि अधिकारी के पद को सहायक निदेशक (विधि) के रूप में स्तरोन्नत करने का निर्णय लिया गया। आईजीएमसी के रेडियोथेरेपी और आेंकोलॉजी विभागों में एसोसिएट प्रोफेसर तथा एसिस्टेंट प्रोफेसर का एक-एक पद सृजित किया जाएगा।

धनियारा ग्राम पंचायत में पशु औषधालय सलेतर तथा ग्राम पंचायत बीड़ तुंगल में पशु औषधालय बीड़ को स्तरोन्नत करने तथा दोनों पशु औषधालयों में पशु चिकित्सक एवं परिचर का एक-एक पद अनुबंध आधार पर भरने को मंजूरी दी।

मंत्रिमंडल ने शहर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम के अंतर्गत सड़क के किनारे एवं अन्य वृद्धि क्षेत्रों में नियोजित एवं नियंत्रित विकास के लिए सराहन विशेष क्षेत्र की सीमाओं में विस्तार के प्रस्ताव को स्वीकृत किया।

सराहन विशेष क्षेत्र में मोहाल सराहन कनाई तथा बौंडा के कुछ क्षेत्र शामिल किए जाएंगे। मंत्रिमंडल ने सूचना एवं जन संपर्क विभाग में अनुबंध आधार पर कनिष्ठ कैमरामैन के दो पद के सृजन की मंजूरी दी। भूरी सिंह संग्रहालय, चंबा में संरक्षण सहायक का पद भरने की स्वीकृति दी गई।

न्यूनतम आय सीमा 12 से 35 हजार की
सरकार ने जलवाहक भर्ती के लिए सालाना आय सीमा को 12 हजार से बढ़ाकर 35 हजार कर दिया। गरीबों के लिए लागू अन्य स्कीमों में भी अब बढ़ी हुई आय सीमा लागू होगी। कैबिनेट ने सेना, नौ सेना, वायु सेना मेडल की सालाना राशि 3000 से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दी। सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल और वश्ष्ठि सेवा मेडल पर अब 3000 के बजाय 4000 मिलेंगे।

आम का समर्थन मूल्य बढ़ाया सरकार ने
मंत्रिमंडल ने आम का समर्थन मूल्य भी तय कर दिया। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत इसका रेट अब 5.50 रुपये के बजाय 6.50 रुपये प्रति किलो होगा। इसके लिए एचपीएमसी और हिमफेड पूरे प्रदेश में 34 कलेक्शन सेंटर खोलेगा। मंत्रिमंडल ने मंडी मध्यस्थता योजना 2013 के अंतर्गत एचपीएमसी की फल विधायन इकाइयों को सेब का रस निकालने के लिए 9705.033 मीट्रिक टन सेब निशुल्क उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया।

यहां एडमिशन पाने वालों को प्रोत्साहन राशि
आईआईटी और आईआईएम के साथ अब इंडियन स्कूल आफ माइनिंग धनबाद और इंडियन इंस्टीच्यूट आफ आफ साइंस बंगलूरू में एडमिशन पाने वाले राज्य के छात्रों को भी प्रोत्साहन राशि मिलेगी। सरकाघाट में प्रतिवर्ष 40 सीटों के जीएनएम प्रशिक्षण संस्थान आरंभ करने के लिए ‘स्वकार’ नर्सिंग स्कूल को अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया गया।

15 कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ
हिमाचल की जेलों में बंद 15 कैदियों की समय पूर्व रिहाई/दया याचिका मामलों को स्वीकृति प्रदान की गई। बाल-बालिका आश्रमों, स्टेट होम और नारी सेवा सदन में रह रहे लोगों के पुनर्वास के लिए मुख्यमंत्री बाल उद्धार योजना के तहत अब 10 के बजाय 20 हजार रुपये धनराशि मिलेगी, ताकि ये अपना रोजगार शुरू कर सकें।

वन भूमि के ‘डायवर्जन’ की स्वीकृति प्रदान की
हिमाचल प्रदेश की कैबिनेट ने प्रदेश सरकार और उपायुक्तों के पास लंबित पड़ी पुरानी और निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं को राहत दी है। परियोजनाओं के पट्टे से संबंधित मामले, जिनके लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, राज्य जंगलात महकमा ने 31 दिसम्बर, 2012 से पहले वन भूमि के ‘डायवर्जन’ की स्वीकृति प्रदान कर दी गई थी। उनको एक मुश्त निपटाने के लिए कैबिनेट ने विशेष मामले के रूप में समान निर्णय लिया।

कैबिनेट ने जिलों के उपायुक्तों को संबंधित निर्माण कंपनियों एवं परियोजनाओं के पक्ष में पट्टा स्वीकृति प्रदान करने तथा सरकारी भूमि उपयोग होने की तिथि से कुल वर्तमान मूल्य (एनपीवी) अथवा उस समय प्रचलित पट्टा मानकों के अनुसार तीन माह की अवधि में वसूल करने का फैसला लिया है। इसके बाद ही महकमे की ओर से पट्टा जारी किया जाएगा। इससे सीधे तौर पर सूबे में बन रही सैकड़ों जल विद्युत परियोजनाओं को पर लाभ होने की उम्मीद है।

क्षमता वृद्धि पर सहमति
मंत्रिमंडल ने पांच मेगावाट से कम क्षमता की न्यूगल, सुप, डोगर, छो, शाहतुल, कत्तन, मैला, धीरा, बलोटा, धीरा-बलोटा और दुकरैन जल विद्युत परियोजनाओं के स्थान और ऊंचाई में परिवर्तन की संस्तुति प्रदान की है, जिससे इन परियोजनाओं की क्षमता में वृद्धि की जा सके।

बैठक में सतलुज जल विद्युत निगम के साथ ऊर्जा खरीद समझौते पर हस्ताक्षर करने को भी स्वीकृति प्रदान की गई। चम्बा जिले में दो मेगावाट की घेरा राज्य जल विद्युत परियोजना को मै. घेरा जल विद्युत परियोजना के पक्ष में बहाल करने का निर्णय लिया गया।
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