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हिमाचल में बिजली उत्पादन को तैयार नहीं निवेशक, निदेशालय ने बढ़ाई तारीख

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Sat, 05 May 2018 12:30 PM IST
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हिमाचल में बिजली उत्पादन करने के लिए निवेशक तैयार नहीं हैं। 28 जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण और उनको चलाने के लिए टेंडर भरने का शुक्रवार को आखिरी दिन था लेकिन किसी भी निवेशक ने टेंडर नहीं भरा। निवेशकों की बेरुखी के चलते ऊर्जा निदेशालय ने टेंडर आमंत्रित करने की तारीख अब 19 जून तक बढ़ा दी है।

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इससे पहले भी निदेशालय टेंडर आमंत्रित करने के लिए तारीखें बढ़ा चुका है। हिमाचल में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने 28 जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण कार्य और उनको चलाने का काम बीओओटी आधार पर देने के लिए 21 मार्च से चार मई तक आवेदन आमंत्रित किए थे।

कुल्लू, किन्नौर, चंबा, लाहौल स्पीति और शिमला जिला में नए बिजली प्रोजेक्ट अलॉट किए जाने हैं। नए प्रोजेक्टों से कुल 1835 मेगावाट की बिजली क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। ये परियोजनाएं अलग-अलग नदी बेसिन पर हैं, जिनमें चिनाब, ब्यास, रावी मुख्य हैं।
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इसके अलावा कई प्रोजेक्ट खड्डों पर भी हैं। कुल 28 परियोजनाओं में से कुछ परियोजनाएं ऐसी भी हैं जिनके लिए ऊर्जा निदेशालय पांच लाख रुपये अलग से लेगा। इनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पहले से तैयार की जा चुकी है।

ऊर्जा नीति के इंतजार में हैं निवेशक

पच्चीस मेगावाट के प्रोजेक्ट के लिए आवेदनकर्ता को एक लाख रुपये बिड डॉक्यूमेंट के लिए देने होंगे, जबकि इससे ऊपर की क्षमता के प्रोजेक्ट के लिए दो लाख रुपये का बिड डाक्यूमेंट मिलेगा। लेकिन निवेशकों द्वारा टेंडर नहीं भरने से सरकार की मुहिम को झटका लगा है। अब ऊर्जा निदेशालय ने 19 जून तक टेंडर जमा करने की तारीख बढ़ाई है। इसी दिन दोपहर तीन बजे टेंडर खुलेंगे।

इन परियोजनाओं का होना है आवंटन- साल एक (6.5 मेगावाट), खौली दो (6.0 मेगावाट), चोबिया एक (14 मेगावाट) और डुगर (449 मेगावाट) रावी व चिनाब बेसिन पर बनने वाले प्रोजेक्ट हैं। इनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पहले से तैयार है। इनके अलावा सेली (400 मेगावाट), बरदंग (138 मेगावाट), पुरथी (210 मेगावाट), मी (7.5 मेगावाट), धेड़ा (8.9 मेगावाट), धेड़ा एक (9.4 मेगावाट), झनकार (24.5 मेगावाट), कुटोई (6.2 मेगावाट), गलवत (12.8 मेगावाट), ऊर एक (5.8 मेगावाट), चिनाब बेसिन पर बनाए जाने हैं।

इसके अलावा नोगली टॉप ( 8.4 मेगावाट), वांगर (36.9 मेगावाट), डुलिंग (8.4 मेगावाट), तागला (63.6 मेगावाट), रोपा स्टेज दो और तीन 205 (मेगावाट), ललूणी (19.5 मेगावाट) खलिहण (19.1 मेगावाट), मनालसू (21.9 मेगावाट), लारा सुमटा (48 मेगावाट), सुमते कोथांग (62 मेगावाट), रोपा टॉप (12 मेगावाट), वांगर (10 मेगावाट), सेरी रावला (7 मेगावाट) और ग्यामथिंग एक (15 मेगावाट) शामिल हैं। 

प्रदेश में अभी तक नई ऊर्जा नीति तैयार नहीं होने के चलते निवेशक हिमाचल में निवेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। नई नीति के तहत रॉयल्टी में छूट मिलने की आस के चलते अभी निवेशक टेंडर भरने का दम नहीं भर रहे हैं।
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