रेफर किए गए तीन घायलों को प्रशासन की तरफ से तहसीलदार नेरवा ऋषभ शर्मा की ओर से तीन-तीन हजार रुपये की फौरी राहत दी गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि कोटी सरांह बस का चालक समझदारी दिखाते हुए बस को दूसरी बस से न टकराता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
वहीं इस हादसे के बाद 108 एंबुलेंस सेवा की पोल एक बार फिर से खुल गई है। बसों में टक्कर होने के बाद जब 108 को बुलाया गया तो यह आई ही नहीं। घायलों को निजी वाहनों में अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों के फोन करने पर करीब एक हफ्ते से झिकनीपुल में खड़ी 108 एंबुलेंस जब नेरवा पहुंची तो इसका एक टायर फटा हुआ था।
एंबुलेंस की इस हालत को देखते हुए एचआरटीसी डिपो नेरवा के कार्यकारी क्षेत्रीय प्रबंधक रतन शर्मा ने टैक्सी में मरीजों को शिमला अस्पताल भेजा। 108 की इस तरह की गैर जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली के प्रति स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।