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जीएसटी की मार, दाल बाजार बेजार

Updated Sat, 24 Jun 2017 11:20 PM IST
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एटा। एक जुलाई से जीएसटी लागू होना है। ऐसे में थोक व्यापारी पुराना स्टॉक बेचने की होड़ में परेशान हैं। पुराना माला बेचने की व्यापारियाें की अफरातफरी के कारण कानपुर और आगरा में दालों के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक गिर चुके हैं। इसका असर स्थानीय बाजारों में भी है। वहीं व्यापारी एक जुलाई से लागू होने जा रहे जीएसटी कानून के विरोध में किराना बाजार बंद रखने की तैयारी कर रहे हैं।
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जीएसटी लागू होने के बाद पहले के मुकाबले अधिक टैक्स लगेगा। दालों पर पांच के मुकाबले आठ फीसदी टैक्स लगेगा। इसके चलते व्यापारी पुराना स्टॉक जल्द से जल्द बेचने की जुगत में हैं। बांस मंडी के किराना व्यापारी अमन कुमार एंड राजीव कुमार ने बताया कि जीएसटी लागू होने के चलते सरकार को पुराना स्टॉक बेचने के लिए कम से कम एक महीने का वक्त देना चाहिए।

व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष प्रमोद गुप्ता ने बताया कि आगरा और कानपुर की मंडी में पुराना स्टॉक खत्म करने के चक्कर में दालों के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक गिरे हैं। पहले किराना आइटम पर चार से पांच फीसदी टैक्स लगता था, लेकिन जीएसटी के बाद आठ फीसदी टैक्स लगेगा। इससे बाजार में महंगाई में बढ़ेगी और छोटे व्यापारियाें को परेशानी होगी।
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किराना के थोक व्यापारी आशीष ने कहा कि जीएसटी लागू होने और पुराना माल खत्म करने के चक्कर में दालों के दाम गिर रहे हैं। व्यापारी दिलीप जैन ने कहा हर कोई पुराना स्टॉक खत्म करना चाहता है। बाजार में नई फसल की दालें आने लगीं हैं। यदि स्टॉक समय पर खत्म नहीं किया गया तो अधिक टैक्स देना पड़ेगा। दालों का उत्पादन बेहतर है। नई दालें आने पर पुराना माल नहीं बिकेगा। जीएसटी लागू होते ही व्यापारी आठ फीसद टैक्स देकर घाटा उठाएंगे।
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दाल के नाम नई दरें पुरानी दरें
काबुली चना 120-125 130-150
चना 72 65
अरहर 60 70
मसूर 50 58
मूंग 50 55
देशी चना 62 68
उड़द 64 72
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नोट-दालों की नई और पुरानी दरे प्रति किग्रा में हैं।
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