आगरा। होटलों को कर्ज देने में अतिरिक्त सजगता बरतने के बैंकों के विचार से पर्यटन इंडस्ट्री में बेचैनी है। यूरोपीय देश मंदी से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार को होटल इंडस्ट्री को प्रोत्साहन देने के लिए सहारे की जरूरत है न कि छीनने की।
कुशमैन एवं वेकफील्ड की रिपोर्ट के मुताबिक देश के महानगरों में स्थित होटलों में निर्माण कार्य आदि के लिए बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण के नियमों को सख्त किए जाने पर विचार किया जा रहा है। बैंकें होटलों को ऋण देने में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। पर्यटन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे विपरीत असर पड़ेगा। कई यूरोपीय देशों में मंदी का दौर चल रहा है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा तो दे दिया गया है मगर सहूलियतें नहीं दी जा रही हैं। नित नयी बंदिशों और टैक्स के बोझ तले विकास की संभावनाएं कैसे तलाशी जा सकती हैं।
चाहिए प्रोत्साहन
मेरा मानना है कि होटल इंडस्ट्री को कम ब्याज दरों पर ऋण देना चाहिए। यूरोप में मंदी का दौर चल रहा है। ऐसे में होटल इंडस्ट्री को सरकारी प्रोत्साहन की जरूरत है। बैंकों को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए। राजीव तिवारी, अध्यक्ष फेडरेशन आफ ट्रेवल एसोसिएशन
इस तरह का फैसला बगैर परखे कैसे लिया जा सकता है। प्रदेश सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है। इस तरह के निर्णय निश्चय ही सरकार की मंशा को धक्का पहुंचाएंगे।
राकेश चौहान, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन
पर्यटन उद्योग को रियायतों की जरूरत है। पहले से ही काफी विसंगतियां हैं। होटल इंडस्ट्री को इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सुविधाओं की दरकार है, न कि कटौती की।
संदीप अरोड़ा, सचिव, फेडरेशन आफ ट्रेवल एसोसिएशन
बैंकों के होटलों को ऋण देने संबंधी सवाल है तो हमारे यहां ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ। यह फैसले अलग-अलग बैंकों के एडवाइजरी बोर्ड करते हैं। हर बैंक की अलग पालिसी होती है।
टीएस गहलौत, चीफ मैनेजर ऋण, स्टेट बैंक