आगरा। इलाज के लिए एसएन पहुंचने वाले हीमोफीलिया के मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। 45 लाख का बजट आने के बाद भी इलाज नहीं मिल रहा है।
आनुवांशिक बीमारी हीमोफीलिया में खून का थक्का नहीं जमता है। इससे मरीजों की जान पर बन आती है। कई बार शरीर में जगह-जगह गांठ निकल आती हैं। इससे असहनीय दर्द होता है। ऐसे मरीजों का इलाज फैक्टर (खून का अवयव) चढ़ाकर किया जाता है। कोर्ट के आदेश के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2010 से हीमोफीलिया का इलाज शुरू किया गया था। इमरजेंसी में वार्ड भी बनाया गया। यहां पर आगरा और आस-पास के करीब 200 मरीज रजिस्टर्ड हैं। इन मरीजों को पिछले आठ महीनों से फैक्टर न होने से इलाज नहीं मिल रहा है।
हीमोफीलिया सोसाइटी, आगरा के अध्यक्ष मनोज ने बताया कि कॉलेज प्रशासन की लापरवाही के चलते कई महीने बाद जनवरी में 45 लाख का बजट मिला है। इसके बावजूद फैक्टर नहीं मंगाए जा रहे हैं। इस बारे में एसएन के प्रिंसिपल डॉ. एसके सिंह से फोन पर संपर्क किया गया मगर बात नहीं हो सकी।
कोई सुनता ही नहीं
हीमोफीलिया के मरीजों में फैक्टर सात, आठ और नौ चढ़ाए जाते हैं। बाजार में इनकी कीमत बहुत अधिक है। एसएन में नि:शुल्क लगने वाले फैक्टर से मरीजों का इलाज हो रहा है। मनोज ने बताया कि फैक्टर मंगाने के लिए कई बार कॉलेज प्रशासन से अपील की गई लेकिन किसी पर कोई असर नहीं हुआ।
वार्ड बन गया कबाड़ घर
एसएन इमरजेंसी में बने वार्ड में मरीजों को भर्ती कर फैक्टर चढ़ाने की व्यवस्था थी। मगर, कई महीनों से यहां इलाज नहीं हो रहा है। इस वार्ड को कबाड़ घर बना दिया गया है।