आगरा। हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फ्लड प्लान जोन के नियमों को दरकिनार कर किए गए निर्माणों नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ध्वस्त करने के आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद विकास प्राधिकरण की नींद टूट गई है। प्राधिकरण उपाध्यक्ष का कहना है कि पंद्रह दिन में ऐसे सभी निर्माणों को चिह्नित कर लिया जाएगा।
यमुना नदी में कंकरीट के जंगल के मामले में दायर याचिका आकाश वशिष्ठ बनाम भारत सरकार पर सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 20 मई को नदी के फ्लड प्लान जोन में हुए वैध और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है। ऐसे मामलों में यह भी देखाना है कि सिंचाई विभाग की ओर अनापत्ति प्रमाण किन हालातों में जारी किया गया है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने प्रदेश के सभी प्राधिकरण, पुलिस, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ऐसी सभी इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है।
ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अजय चौहान ने बताया कि शहर में यमुना के किनारे जितने भी निर्माण हुए हैं उनका परीक्षण कराया जाएगा। सिंचाई विभाग की मदद से पता किया जाएगा कि आगरा में फ्लड प्लान जोन की लिमिट क्या है। बिना स्वीकृत मानचित्र के हुए निर्माण को ध्वस्त किया जाएगा। जिन भवनों का मानचित्र प्राधिकरण से स्वीकृत हुआ है वह बिना सिंचाई विभाग की अनापत्ति के नहीं हुआ होगा। लिहाजा अनापत्ति प्रमाण पत्रों का परीक्षण किया जाएगा। सभी विभागों की संयुक्त टीम बनाकर यमुना के रिवर बेल्ट में हुए निर्माणों को 15 दिन के अंदर चिह्नित किया जाएगा।
इनबाक्स.....
वर्षों से चल रहा यमुना को पाटने का खेल
आगरा। आगरा में यमुना को पाटकर निर्माण करने का खेल वर्षों से चल रहा है। सिकंदरा से लेकर जीवनी मंडी तक हजारों की संख्या में भवनों का निर्माण हो चुका है। फ्लड प्लान जोन को छोड़िए यमुना में मलबा डालकर उसे पाट दिया जाता है उसके बाद उसमें घर बना दिए जाते हैं। जीवनी मंडी जोंस मिल के पास तो वर्षों पुरानी जलकल विभाग की पानी की लाइनों पर मकान खड़े हो गए हैं। पिछले दो तीन वर्षों में आगरा विकास प्राधिकरण ने ही करीब पांच बिल्डरों की कालोनी और ग्रुप हाउसिंग का मानचित्र स्वीकृत किया है। उल्लेखनीय है कि अमर उजाला पूर्व में खबरें प्रकाशित कर प्रशासन को जागरूक करता रहा है।
इनबाक्स.....
यमुना में पानी बढ़ते मचती है हाहाकार
आगरा। शहर में यमुना का लो प्लड जोन करीब 495 फुट है। हाई फ्लड जोन करीब 510 फुट पर बताया जाता है। यमुना में जरा पानी बढ़ने पर नाले चोक होने लगते हैं और तटवर्ती कालोनियों तक पानी पहुंच जाता है। पिछले वर्ष सितंबर माह में करीब 300000 क्यूसेक पानी गोकुल बैराज से छोड़े जाने पर यमुना के किनारे बसी दयालबाग और कृष्णा कालोनी में पानी प्रवेश कर गया था।