शिवनारायण साहू
आगरा। वे रेल कर्मचारी हैं लेकिन उन्हें अपने घर पहुंचने के लिए ‘पोस्टर’ का सहारा लेना पड़ रहा है। सामान्य स्थानांतरण के बेहद मुश्किल होने के कारण उन्होंने घर या उसके नजदीक स्थानांतरण की चाह में अनूठा तरीका निकाला है। नियमानुकूल न होते हुए भी वे म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए साथी की तलाश में ‘विज्ञापन’ कर रहे हैं। मंडल कार्यालय के कार्मिक विभाग की दीवारें ऐसे पोस्टरों से पटी पड़ी हैं।
कार्मिक विभाग की दीवारों को देखकर लगता है कोई परीक्षा परिणाम निकला है या फिर चुनाव के विज्ञापन चस्पा हैं। गौर से देखने पर पता चलता है कि घर से सैकड़ों मील दूर पड़े कर्मचारी इनके जरिए अन्यत्र तैनात ऐसे कर्मचारी को खोज रहे हैं जो उनके स्थान पर आगरा आना चाहता हो। यह सूचना उन तक यहां आने वाले परिचित कर्मचारियों के जरिए पहुंचती है। दरअसल रेलवे में म्यूचुअल ट्रांसफर तो आसान हैं लेकिन सीधे आवेदन के बाद वर्षों इंतजार करना पड़ता है। आगरा में दर्जनों ऐसे कर्मचारी हैं जो आवेदन के बाद दशकों से अपने डिवीजन अथवा उसके नजदीक स्थानांतरण का इंतजार कर रहे हैं। विभाग स्टाफ की कमी बताकर स्थानांतरण नहीं कर रहा।
ये है म्यूचुअल ट्रांसफर
दो समान पद, वेतन और एक ही विभाग के कर्मचारी यदि एक-दूसरे के स्थान पर आपसी सहमति से आते हैें तो इसे म्यूचुअल ट्रांसफर कहा जाता है। ऐसा चाहने वालों को एसीसी फार्म भरना होता है। समान विभाग, पद होने के कारण विभाग उनका आसानी से स्थानांतरण कर देता है।
विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। म्यूचुअल ट्रांसफर अचूक नुस्खा है। इसमें कम समय में दोनों कर्मचारियों को मनचाहा स्थान मिल जाता है। चूंकि इससे मैन पावर वही बना रहता है अत: रेलवे भी आपत्ति नहीं करता।
राकेश पाठक, मंडल अध्यक्ष एनसीआरएमयू
सामान्य ट्रांसफर की तुलना में म्यूचुअल ट्रांसफर आसान हैं, लेकिन इसके लिए कर्मचारी विज्ञापन नहीं निकाल सकते। केवल विभागीय आवेदन हो सकते हैं। अगर किसी ने विज्ञापन निकाला है तो जांच की जाएगी।
भूपेंद्र ढिल्लन, जनसंपर्क अधिकारी, रेलवे आगरा मंडल