आगरा। वासंती चूनर ओढ़ दयालबाग इठला रहा है। मन हर्षित तो मयूर सा नाच रहा है। हृदय में खुशी के भाव स्फुटित हो रहे हैं। वातावरण में वसंत के स्वागत की स्वर लहरियां गुंजायमान हैं। घरों, कॉलोनियों सहित पूरे दयालबाग में तैयारियों जोर-शोर से चल रही हैं। दयालबाग का शताब्दी समारोह होने के कारण उत्साह चौगुना है।
दयालबाग की स्थापना वसंत पंचमी के दिन ही सन् 1915 में हुजूर साहब जी महाराज ने पवित्र मुबारक कुआं के निकट शहतूत का पेड़ लगाकर की थी। इसलिए वसंत पंचमी को दयालबाग में उमंग, उल्लास व उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार खास मौका इसलिए भी है क्योंकि दयालबाग के एक सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसे लेकर घरों के दरवाजों पर बंदनवार, फूल, कागज की बनी झंडियां लगाई जा रही हैं। साफ-सफाई, रंगाई-पुताई का दौर भी जारी है। पीले फूलों से की जा रही भव्य सजावट लोगों को आकर्षित कर रही है। वहीं कालोनियों में वसंत ऋतु का स्वागत करते बैनर-पोस्टर भी लगा दिए गए हैं। मीडिया प्रभारी एसके नय्यर ने बताया कि इस बार भी वसंत पंचमी पर तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें देशभर के अलावा विदेशों से भी आकर सत्संगी भाग लेंगे। शनिवार से सत्संगियों के आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पांच फरवरी तक आयोजित शताब्दी समारोह में बेबी शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संध्या फेरी, खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। वहीं बाहर से आने वाले सत्संगियों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए एक केंद्र से महज 20 प्रतिशत सत्संगी को ही आने की अनुमति दी जाएगी।
मुबारक कुएं का इतिहास
20 जनवरी 1915 को हुजूर साहब ने मुबारक कुआं के निकट शहतूत का पेड़ लगाकर दयालबाग की नींव रखी थी। इस मुबारक कुएं का अपना इतिहास है। जब परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामी जी महाराज यहां घूमने आया करते थे उनके शिष्य द्वितीय आचार्य संत सतगुरु कुएं से पानी खींचकर स्वामी जी महाराज की सेवा में पेश करते थे। तब वहां कटीली झाड़ियां व ऊंचे टीले थे। महाराज जी ने फरमाया था कि एक दिन कुएं के पास सत्संग की एक बहुत बड़ी कालोनी होगी। यह मुबारक कुआं और शहतूत का पेड़ आज भी संरक्षित है। परम पूज्य हुजूर साहब जी महाराज राधास्वामी मत के पंचम आचार्य ने वसंत पंचमी 20 जनवरी 115 को दयालबाग की नींव रखी और अगले ही दिन 21 जनवरी 1915 को दयालबाग की शिक्षा की पहली इमारत आरईआई कॉलेज की स्थापना की। जो अब दयालबाग विश्वविद्यालय के दीक्षांत भवन परिसर के नाम से प्रसिद्ध है।
ये होंगे कार्यक्रम
3 फरवरी
6.15 बजे : खेतों में सत्संग
2.45 बजे : प्राथमिक विद्यालय में खेलकूद प्रतियोगिताएं
6.15 बजे : लाइटिंग का कार्यक्रम
4 फरवरी
5.15 बजे : सत्संग आरती
6.15 बजे : सत्संग भवन में कार्यक्रम
7.00 बजे : खेत में सत्संग
12.30 बजे : सत्संग हॉल में सत्संग
6.15 बजे : लाइटिंग
5 फरवरी:
6.00 बजे : खेत में सत्संग
4.15 बजे : सत्संग हॉल में जिमनास्टिक
6.15 बजे : नाटक का मंचन
7.00 बजे : भव्य लाइटिंग