आगरा। यमुना नदी में प्रदूषण की वजह से बिगड़ी शहर की पेयजल व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी है। जलकल विभाग के अफसरों का कहना है कि पचावर ड्रेन से गंगाजल मिलने से कुछ सुधार हुआ है।
जलकल विभाग के अफसर सिंचाई विभाग के अफसरों के संपर्क में है। यही नहीं वे यमुना, गोकुल और हिंडन बैराज पर भी नजर रखे हुए है। अधिकारियों का कहना है कि गाजियाबाद में हिडंन बैराज का गेट नंबर चार टूटने की वजह से नदी में प्रदूषण बढ़ा था। इस समस्या से निजात पाने की के लिए बल्देव रजवाहा से यमुना में गंगाजल की मात्रा बढ़ाने को कहा गया था। बुधवार को जलकल विभाग के सचिव वीके गुप्ता और चीफ केमिस्ट डा. दीपक सिंह के गोकुल बैराज का निरीक्षण करने की संभावना है। जलकल विभाग की जीएम मंजू रानी गुप्ता कहना है कि हालातों पर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा।
सूचना न देने पर जुर्माना
आगरा। जलकल विभाग के सूचना के अधिकार के तहत आवेदक को सूचना न देना भारी पड़ गया है। राज्य सूचना आयुक्त ज्ञान प्रकाश मौर्य ने पांच अलग-अलग मामलों में 25 हजार रुपये का जुर्माना किया है। डिफेंस एस्टेट बिंदु कटरा निवासी महेश चंद, विनोद कुमार, भगवती प्रसाद, शकुंतला देवी पत्नी केएस शर्मा ने सितंबर 2009 में सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। उनका कहना था कि वे प्रतिवर्ष जलकल विभाग को बिल भुगतान कर रहे हैं लेकिन 2009-10 के बिल में 3,592 रुपये अवशेष दिखाए गए थे। उन्होंने पूछा था कि विभाग बताए यह बकाया किस वर्ष का है।