आगरा। मदिया कटरा रोड स्थित मेट्रो एंड मेट्रो शू फैक्ट्री में मंगलवार रात को लगी भीषण आग पर बुधवार की सुबह सात बजे तक सेना और फायर ब्रिगेड के जवानों ने काबू पा लिया था। लपटों से भट्ठी बनी दूसरी मंजिल में दरारें पड़ गईं। अग्निकांड से लगभग सात करोड़ों के नुकसान का अनुमान है।
बताते चलें कि मेट्रो एंड मेट्रो शू फैक्ट्री के सेकेंड फ्लोर में मंगलवार की रात को आग लग गई थी। पेट्रोल पंप नजदीक होने के कारण भी अधिकारियों की सांसें फूली हुई थीं। आग के विकराल होने पर एयरफोर्स, सीओडी, आर्मी, मथुरा रिफाइनरी, फीरोजाबाद से भी दमकलों को बुलाया गया था। पुलिस के मुताबिक, 28 दमकलों का इस्तेमाल किया गया। सेना के जवानों ने हाइड्रोलिक सीढ़ी नहीं होने पर नगर निगम की होर्डिंग लगाने वाली ट्राली का इस्तेमाल किया।
सीएफओ एबी पांडेय, एफएसओ एसएस राय और रेहान अली समेत पांच फायर कर्मियों ने सारी रात आग बुझाने में मशक्कत की। सेना की दमकलों के आने पर फोम का इस्तेमाल हो सका। रात साढ़े तीन बजे विभीषिका कुछ कम हो सकी। तड़के छह बजे तक आग लगभग बुझाई जा चुकी थी। साढ़े सात बजे फायरकर्मियों ने आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।
मदद को पहुंचे सैकड़ों कारीगर
टीवी पर आग की खबर देखकर जूता फैक्ट्री के सैकड़ों कर्मचारी रात में ही मौके पर पहुंच गए। फैक्ट्री के प्रोडक्शन मैनेजर आरके शर्मा ने बताया कि कारीगरों ने आग बुझाने के दौरान खासी मदद की।
दरारें पड़ने पर सहमे फायरकर्मी
फैक्ट्री के सेकेंड फ्लोर में लगी भीषण आग से लोहे के गार्डर भी टेढ़े हो गए। अग्निकांड से इमारत के ऊपरी हिस्से को भारी क्षति पहुंची है। यही कारण था कि फायरकर्मी अगले हिस्से से छत के रास्ते से ऊपर नहीं जा रहे थे। हालांकि ऊपरी हिस्से में चेंबर बने होने के कारण इमारत ढहने से बच गई।
अन्य हिस्से में आज से काम होगा
हादसे के चलते बुधवार को फैक्ट्री में अवकाश रहा। सेकेंड फ्लोर में काम शुरू होने में कई माह लग सकते हैं। वहीं फैक्ट्री के दूसरे हिस्सों में गुरुवार से कामकाज शुरू हो जाएगा।
यूरोपियन स्टैंडर्ड होता है फॉलो, हुआ था ऑडिट
मेट्रो एंड मेट्रो शू फैक्ट्री में केमिकलों का इस्तेमाल बहुत कम होता है। प्रोडक्शन मैनेजर ने बताया कि फैक्ट्री में यूरोपियन स्टैंडर्ड फॉलो किया जाता है। इसकी गुणवत्ता को देखने केलिए समय समय पर ऑडिट भी होता है। तीन दिन पहले ही ऑडिट हुआ था। आग लगने से कुछ घंटे पहले रात नौ बजे सिक्योरिटी चेक भी हुआ था। इसमें इलेक्ट्रिशियन समेत अन्य कर्मचारी होते हैं। जो पूरी फैक्ट्री को चेक करते हैं।