आगरा। राज्य के दूसरे नंबर की भाषा उर्दू के प्रति शिक्षा जगत उदास होता जा रहा है। न तो पढ़ने वालों में उर्दू के प्रति रुचि दिखाई दे रही है और न ही सरकारी स्तर पर इसके प्रचार-प्रसार पर ध्यान दिया जा रहा है। आलम यह है कि परिषदीय स्कूलों में पिछले तीन साल से उर्दू की किताबें नहीं आई हैं।
प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद की कक्षा छह से आठ तक की कक्षाओं का कोई भी छात्र उर्दू विषय ले सकता है। मगर, परिषदीय स्कूलों में उर्दू पढ़ने वाले छात्रों की संख्या दिन पर दिन घटती जा रही है। इसके लिए विभाग की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए। आलम यह है कि जनपद में लगभग 160 उर्दू शिक्षक हैं लेकिन वह भी दूसरे विषय पढ़ा रहे हैं। उर्दू के प्रति कम होती रुचि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन साल से जिले के परिषदीय स्कूलों की तरफ से उर्दू की किताबों की डिमांड ही नहीं भेजी गई है। इस सत्र में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। इस बार भी उर्दू की किताबों की जरूरत नहीं पड़ रही।
दो सरकारी मदरसों के अलावा जिले के एक भी परिषदीय विद्यालय से उर्दू की किताबों की डिमांड नहीं भेजी गई है। जिन मदरसों ने डिमांड भेजी थी, उन्हें उर्दू की किताबें उपलब्ध करा दी गई हैं।
देवेंद्र प्रकाश, बेसिक शिक्षा अधिकारी