आगरा। मनीषा, श्यामवती और फिर प्रमोद। यह वह हैं, जो झोलाछाप इलाज का शिकार हो जान गवां बैठे। यह तो चंद उदाहरण भर हैं, झोलाछाप नीम हकीम इलाज के नाम पर हर रोज जाने कितने मरीजों की जान से खेल रहे हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग इनका संजाल काटने में नाकाम है। वहीं इनके लुभावने प्रचार के कारण अथवा अज्ञानतावश मरीज इसमें अनचाहे आ फंसते हैं।
स्वास्थ्य विभाग में 91 झोलाछाप चिह्नित हैं। इनके नाम-पते सीएमओ कार्यालय की दीवार पर अंकित हैं। हकीकत में यह संख्या चार हजार से अधिक है। दो साल पहले ट्रांस यमुना कॉलोनी में झोलाछाप ने गर्भवती मनीषा की बच्चेदानी निकाल दी। अत्यधिक रक्तश्राव से मनीषा की मौत के मामले ने तूल पकड़ा तो विभाग ने 91 झोलाछाप के खिलाफ एफआईआर कराई। मामला ठंडा पड़ा और इधर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई भी। अब 10 जून को फतेहपुर सीकरी में गर्भवती श्यामवती की मौत हुई तो सोमवार को प्रमोद इनका शिकार बना।
झोलाछाप घनी बस्तियों में छुपकर दुकान चलाते हैं। अगर जनता इनकी शिकायत विभाग से करे तो इनपर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है।
डा. एके कुलश्रेष्ठ, सीएमओ
सीएमओ से झोलाछाप और अवैध हास्पिटल की सूची मंगाई जाएगी। कार्रवाई के लिए इनकी रिपोर्ट डीजी शिक्षा एवं चिकित्सा को भेजी जाएगी।
डा. सत्यमित्र, अपर निदेशक शिक्षा एवं चिकित्सा
नहीं होती वीडियोग्राफी
छापे में फोटोग्राफी, मरीज और गवाहों के बयान, टीम के सदस्यों का विवरण, दुकान और सामग्री सीज करना, शैक्षणिक दस्तावेजाें की जांच और मुकदमा दर्ज कराना शामिल है। विभाग वीडियोग्राफी नहीं कराता।
क्या कहता है कानून
इंडियन मेडिकल काउंसलिंग एक्ट 1956 की धारा 15(3) आईपीसी की धारा 420 के तहत झोलाछाप पर आपराधिक मामला दर्ज करने का प्रावधान है।
नाम बदल फिर चल पड़ी
झोलाछाप का संजाल मजबूत है। सीलिंग के बाद ये नाम बदल फिर से दुकान सजा लेते हैं। यही हाल अस्पतालों का है। बीते दिनों स्वास्थ्य विभाग ने सात अस्पताल के लाइसेंस निरस्त किए। नाम बदल ये फिर चालू हो गए।
दवा कंपनियाें के भी चहेते
झोलाछापों के सिर पर अस्पताल संचालकाें के साथ दवा कंपनियों का भी हाथ है। दरअसल ये दवा कंपनियों के बड़े ग्राहक हैं। इनके दवा लिखने से कंपनियों को मोटी कमाई होती है।
24 घंटे जानलेवा सेवा
झोलाछाप डाक्टर से ही नहीं बल्कि मरीज की जान अवैध हास्पिटलों में भी सुरक्षित नहीं है। जिले में 2151 चिकित्सकीय संस्थाएं पंजीकृत हैं। इसमें 1582 क्लीनिक, 357 नर्सिंग होम, 95 पैथोलॉजी, 84 डाग्नोसिस सेंटर हैं। इनमें एक हजार से अधिक ने लाइसेंस रिन्यूवल नहीं कराया। यह हाल तब है कि जब कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को ऐसे संस्थानाें पर सीलिंग कर मुकदमे दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। इनमें अग्निशमन विभाग व नगर निगम की एनओसी, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सकीय उपकरणाें की कमी साफ है।
और कार्रवाई भी हुई
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प्रमोद की मौत के आरोपी पर एफआईआर, दुकान सील
शमसाबाद और धिमश्री में ताबड़तोड़ छापे
दो अन्य दुकानें भी सील, पांच को नोटिस
शमसाबाद में झोलाछाप के हाथों प्रमोद की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शमसाबाद और धिमश्री में ताबड़तोड़ छापामार कार्रवाई की। आरोपी डीके राय उर्फ देबो बंगाली समेत दो झोलाछाप मकान खाली कर फरार हो गए। टीम ने आरोपी की गैरमौजूदगी में दुकान सील कर एफआईआर दर्ज कराई। शमसाबाद में सोमेंद्र और देवीराम कुशवाहा की दुकान सील की साथ ही यहां के अजय कुमार शर्मा, केके शर्मा, सुरेश चंद, एमके अधिकारी, जगदीश प्रसाद शर्मा को नोटिस थमाया। अपंजीकृत डाक्टर के नोडल प्रभारी डा. आनंद वर्मा ने बताया कि पांच को नोटिस देकर उनसे रजिस्ट्रेशन और शैक्षणिक दस्तावेज मांगे है, उपलब्ध न कराने पर सीलिंग होगी।
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मरीज को एक्सपायर दवा देने पर हंगामा, रिपोर्ट दर्ज
विजय नगर के राजकुमार जैन की पत्नी मधु जैन को लो बीपी की शिकायत थी। मंगलवार को सुबह लाजपत कुंज, खंदारी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। राजकुमार ने बताया कि पास के ही बाबा मेडिकल स्टोर से दवाएं ले आए। उनकी बेटी मोनिका ने देखा कि ग्लूकोज की बोतल बीते मार्च में ही एक्सपायर हो चुकी थी। दुकानदार से शिकायत की गई तो उसने भूलवश ऐसा होना बताया। जवाब से असंतुष्ट राजकुमार ने पुलिस और ड्रग कंट्रोलर को सूचना दे दी। यह देख दुकानदार स्टोर में रखे पैकेट को बाहर ले जाने लगा। परिजनों ने उसे पकड़ कर हंगामा शुरू कर दिया। जांच में ग्लूकोज और एक्सपायरी दवाआें का एक-एक पैकेट बरामद हुआ। ड्रग कंट्रोलर पीके मोदी ने बताया कि लाइसेंस तो है, लेकिन इसके रिन्यूवल की जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।