आगरा। दयालबाग शिक्षण संस्थान सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नित नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। न सिर्फ सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयास चल रहे हैं, बल्कि संस्थान के विभिन्न हिस्सों में हो रही बिजली की खपत की जानकारी एक जगह बैठकर ली जा सकेगी। इसके लिए ‘स्मार्ट माइक्रो ग्रिड सिस्टम’ तैयार किया जा रहा है। इस काम में पावरग्रिड के अधिकारियों ने भी सहयोग का वादा किया है।
दयालबाग शिक्षण संस्थान पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित हो रहा है। वर्तमान में दो फेज काम कर रहे हैं, जबकि तीसरे के लिए काम जारी है। फेज एक में 550 किलोवाट बिजली उत्पादन हो रहा है। फेज दो में 40 किलोवाट का सिस्टम लगा है और केंद्र सरकार के नवी एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से 250 किलोवाट के लिए अप्रूवल मिल चुका है। साथ ही अन्य 250 किलोवाट के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वर्ष 2016 में फेज तीन में काम शुरू किए जाने की योजना है। यानी संस्थान वर्ष 2018 तक 1.5 मेगावाट का लक्ष्य हासिल कर लेगा। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य करने पर डीईआई पहले ही देश में प्रथन स्थान पर है, जबकि नए उत्पादन लक्ष्य को पाने के बाद संस्थान वैश्विक स्तर पर भी नई ऊंचाइयां छुएगा।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डी. भगवान दास ने बताया कि यहां स्मार्ट माइक्रो ग्रिड सिस्टम तैयार किया जा रहा है। यह एक सेंट्रल कंट्रोल सिस्टम होगा। इससे संस्थान के विभिन्न विभागों में खर्च होने वाली यूनिट का एक ही जगह बैठकर पता लगाया जा सकेगा। भविष्य में यह अन्य जगहों पर भी प्रयोग में लाया जा सकता है। इसके लिए पावरग्रिड के अधिकारियों से वार्ता हुई है। हालांकि अभी एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं।