एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

..और बच गई नन्ही सी जान

Agra Updated Fri, 29 Aug 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

आगरा। जिस बच्ची ने अभी आंखें ही खोली थीं कि पिता ने जान लेने की कोशिश की। यमुना में बहाए जाने से पहले उसकी रुलाई क्या फूटी, जान बच गई। लगा। वरना उसका पिता इसी नीयत से कैलाश घाट आया था। उसे लेकर आए आटो चालक की सूझबूझ ने भी बच्ची की जान बचाने में मदद की।
विज्ञापन
विज्ञापन

घटना कैलाश घाट की है। मूल रूप से मैनपुरी का रहने वाला युवक मजदूरी करता है। वह पत्नी और दो बेटियों के साथ सिकंदरा क्षेत्र में किराये के मकान में रहता है। बुधवार को पत्नी के तीसरी बेटी पैदा हुई। गुरुवार को पत्नी को अस्पताल से छुट्टी दिलाकर पति बच्ची को घर ले आया। अंधेरा होने पर मजदूर ने बच्ची को मां की गोद से उठा लिया। आटो से कैलाश घाट को चला। चालक को बताया कि बच्ची मर गई है। उसे जल प्रवाह के लिए ले जा रहा है। घाट पहुंचते ही बच्ची ने रोना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर चालक के होश उड़ गए। उसने शोर मचाया। वहां मौजूद रामलाल वृद्ध आश्रम के मैनेजर मुकेश शर्मा ने मजदूर से पूछताछ की। कुछ ही देर में भीड़ लग गई। ग्राम प्रधान सोमेश गिरि, आश्रम अध्यक्ष शिव प्रसाद शर्मा भी आ गए। शिव प्रसाद ने बताया कि मजदूर नशे में था। वह जिंदा बच्ची को यमुना में बहाने लाया था। उसे पुलिस के हवाले किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर, वह बच्ची को नहीं रख पाता तो आश्रम उसे गोद लेने को तैयार है। पुलिस ने पत्नी को थाने लाकर पूछताछ की।



पत्नी ने भी दिया साथ
मजदूर की पत्नी का कहना था कि बेटी पैदा हुई तभी से बीमार थी। डाक्टर ने आपरेशन जरूरी बताया था। घर लाए तो सांसें नहीं चल रही थीं। तब उसे बहाने भेजा। जब उससे पूछा गया कि बच्ची मर गई थी तो पड़ोसियों को क्यों नहीं बताया या रात के वक्त अकेले जल प्रवाह के लिए क्यों लाया गया, इनका जवाब वह न दे सकी।
विज्ञापन


एनोरेक्टल माल्फारमेशन
पुलिस ने बताया कि बच्ची के पेशाब और मलद्वार बंद हैं। डाक्टर इसे एनोरेक्टल मालफारमेशन कहते हैं। डाक्टर ने उसका बड़ा आपरेशन बताया है। खर्च अधिक होने के कारण वह बच्ची को बहाने ले जा रहा था। पिता की माली हालत को देखते हुए बच्ची का इलाज कराने के प्रयास किए जा रहे है। एसएन में आपरेशन की सुविधा नहीं है।
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें