आगरा। उत्तर भारत की प्रसिद्ध रामलीला में रामायण के प्रसंगों के मंचन के साथ-साथ ‘अहंलीला’ भी शुरू हो गई है। अवधपुरी से जनकपुरी तक यह लीला छाई हुई है। अवधपुरी में राम बारात की आरती पर कमेटी और महंत का विवाद गर्म है तो जनकपुरी में पदाधिकारियों के मतभेद में परंपराएं दरकिनार की जा रही हैं।
अर्से से श्रीराम लीला कमेटी राम बारात निकालती है। इसकी शुरुआत मन:कामेश्वर मंदिर के महंत द्वारा आरती से होती रही है। पिछले साल मंदिर की बाराहदरी के पीछे ठनी तो महंत ने कमेटी वालों पर डकैती का मुकदमा दर्ज करा दिया। इससे भड़की कमेटी ने महंत से श्रीराम बारात की आरती नहीं कराई। महंत इसी बात पर हाईकोर्ट तक गए पर याचिका खारिज हो गई। कमेटी ने इस बार भी ऐसा ही कराने का ऐलान किया है।
ये तो था ही, जनकपुरी समिति के पदाधिकारियों के मतभेद भी सामने आने लगे हैं। आयोजन के निमंत्रण का एक कार्ड समिति बंटवा रही है तो दूसरा राजा जनक बने वीरेंद्र महाजन की तरफ से लोगों के पास पहुंच रहा है। दोनों पर कार्यक्रम अलग-अलग हैं। यानी एक ही दिन दोनों ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
परंपराओं से खिलवाड़
बंद हो : हमारा आगरा
सामाजिक संस्था हमारा आगरा ने प्राचीन धार्मिक आयोजन में अहं की जंग को जनभावना के साथ खिलवाड़ करार दिया है। सोमवार को संस्था के सदस्यों ने मीडिया से कहा कि इस लड़ाई में परंपराएं तोड़ी जा रही हैं। उन्होंने अपील की कि रामलीला कमेटी और महंत अपने-अपने हठ त्यागकर जनमानस की भावनाओं और परंपराओं का आदर करें। वार्ता में संस्था अध्यक्ष ओम शर्मा, पंडित चंदनलाल पाराशर, जगदीश किशोर पाठक आदि मौजूद थे।