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होटल और मार्केट में भीषण आग, 40 दुकानें जलीं

होटल और मार्केट में भीषण आग, 40 दुकानें जलीं Updated Thu, 11 Aug 2016 01:28 AM IST
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सदर भट्ठी में अग्निकांड के बाद मची अफरातफरी, बाजार हुआ बंद  आगरा, मथुरा और फीरोजाबाद की दमकलें लगीं 12 घंटे तक चलता रहा आग बुझाने का काम  अग्निकांड में हुआ करोड़ों रुपये का नुकसान  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सदर भट्ठी स्थित होटल जिज्ञासा पैलेस एंड रेस्टोरेंट के कांप्लेक्स मेें बुधवार सुबह भीषण आग लग गई। आग की चपेट में कांप्लेक्स की 40 से ज्यादा दुकानें और होटल भी आ गया। विकराल लपटों और धुएं में होटल में रुके पर्यटक और व्यापारी फंस गए। एक घंटे बाद उन्हें बाहर निकाला गया। आग की भयावहता को देखते हुए आसपास के घरों को भी खाली करा लिया गया। 14 घंटे तक आग बुझाने काम चलता रहा। करोड़ों का नुकसान हुआ है। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया गया है।
सदर भट्ठी निवासी आशीष शिवहरे का घर के सामने होटल जिज्ञासा पैलेस है। होटल के नीचे कांप्लेक्स में मोहिनी मार्केट और किशन कांप्लेक्स है। मोहिनी मार्केट के बेसमेंट में पार्किंग, भूतल और प्रथम तल पर 22-22 दुकानें, द्वितीय पर 18 दुकान, वहीं तृतीय तल पर होटल है। वहीं पर मैरिज होम बना हुआ है। मार्केट में तकरीबन 70 दुकानें हैं। सभी दुकानों में शू मैटेरियल भरा हुआ था। सुबह तकरीबन 7.10 बजे भूतल पर बनी अजय बंसल की फोम की दुकान में आग लगी। कुछ ही देर में आग की चपेट में उनकी 11 दुकानें आ गईं। इसके बाद प्रथम, द्वितीय और तृतीय तल तक आग फैल गई। चौकीदार अशोक की सूचना पर होटल मालिक सहित अन्य लोग आ गए। होटल के कमरों में रुके पर्यटक और व्यापारियों में चीखपुकार मच गई। उन्हें खिड़की के शीशे तोड़कर पीछे के रास्ते से बाहर निकाला गया। सूचना पर आधा घंटे बाद छह दमकल पहुंच गईं। आसपास के सभी मार्केट की दुकानों से व्यापारियों ने सामान निकालना शुरू कर दिया। किशन कांप्लेक्स को भी खाली कर दिया। दस बजे आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया। लेकिन आधा घंटे बाद फिर से आग भड़क गई। मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस चौहान, एसपी सिटी सुशील घुले, सीओ छत्ता बीएस त्यागी सहित कई थानों की पुलिस फोर्स पहुंच गई। रात तकरीबन नौ बजे तक आग बुझाने का काम जारी था। फायरब्रिगेड के मुताबिक, आग शार्ट सर्किट से लगने का अनुमान है। मार्केट में आग बुझाने के उचित प्रबंध नहीं थे। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। आगरा के अलावा मथुरा और फीरोजाबाद को मिलाकर तकरीबन 15 दमकल लगाई गईं। 
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पर्यटक बोले, आग बुझाने के इंतजाम नहीं 
जिज्ञासा होटल में 19 कमरे हैं। 14 प्रथम तल पर तो पांच द्वितीय तल पर हैं। मंगलवार रात को 13 कमरों में तकरीबन 24 लोग रुके हुए थे। इनमें जयपुर, महाराष्ट्र और नेपाल के पर्यटक भी शामिल थे। बंगलूरू के सिद्दीक और मुनीर कमरा नगर 110 में ठहरे हुए थे। उन्हें आग लगने की जानकारी धुआं आने पर हुई। वह कमरे में ही बंद हो गए। एक घंटे बाद वह कमरे के पीछे बनी खिड़की का शीशा तोड़कर बाहर आए। घायल भी हो गए। लोगों का कहना था कि किशन कांप्लेक्स और मोहिनी मार्केट की सभी दुकानों में शू मैटेरियल भरा हुआ था। बुधवार को आग जिस वक्त लगी, उस समय मार्केट में सभी दुकानें बंद थीं। अगर, मार्केट खुला होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। होटल और कांप्लेक्स में फायर फाइटिंग के उचित प्रबंध नहीं थे। कांप्लेक्स में बेसमेंट बना हुआ, जिसमें पार्किंग की व्यवस्था है, लेकिन वहां कभी वाहन खड़े नहीं होते हैं। वहां भी शू मैटेरियल भरा जाता है। होटल में जाने के लिए सीढ़ी है, जो काफी छोटी है। 

तीन मोबाइल टावर भी हुए गिरासू 
कांप्लेक्स की छत पर ही तीन मोबाइल टावर लगे हैं। आग की वजह से तीनों टावर टेढ़े पड़ गए, जिनके घरों पर गिरने की आशंका पर मार्केट के पीछे मोहल्ले के घरों को खाली करा लिया गया। 

कर्मचारियों ने निकाले पांच सिलेंडर 
होटल में आग की लपटें पहुंचने के बाद कर्मचारी गौरव, प्रांजल, प्रताप ने पाइप लेकर आग बुझाना शुरू कर दिया। वहीं किचिन में रखे पांच सिलेंडरों को जैसे-तैसे नीचे लेकर आए। 

इन दुकानों में नुकसान 
अजय बंसल की फोम की 11 दुकानें, लईक के मुगल बूट हाउस की 11, आरएन पाल और फइमुद्दीन की डेल्टा ट्रेडिंग कंपनी की तीन, मुगीस भाई की अमर ट्रेडिंग कंपनी की एक, इदरीश की शू डील और चंद्रवीर सिंह की हरिकिशन एंटरप्राइजेज की दो दुकानों में शू मैटेरियल जल गया। मार्केट की अन्य 11 दुकानों में भी नुकसान हुआ। कई दुकानों में रखा सामान खराब हो गया।

बंद करना पड़ा रास्ता 
अग्निकांड के बाद सर्किल के थानों की फोर्स बुला ली गई। पुलिस ने सदर भट्ठी रोड के ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया। कलक्ट्रेट से किसी भी वाहन को चौराहे की तरफ नहीं जाने दिया। वहीं मंटोला से भी रास्ता रोका गया। 

संकरी गली में मार्केट, फायरब्रिगेड बेखबर 
हींग की मंडी, सदर भट्ठी, मंटोला, रावत पाड़ा सहित पुराने बाजार में कई मार्केट बन गए हैं। इनमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी की है। कई मार्केट ऐसे हैं जिनके मालिकों ने फायरब्रिगेेड तक की एनओसी नहीं ली। बावजूद इसके फायरब्रिगेड के अधिकारी बेखबर हैं। वहीं एडीए के अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। 
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