ब्रज धाम के गोवर्धन स्थित गिरिराज दानघाटी सहित चार मंदिरों के पट शुक्रवार को मंगलाचरण आरती के साथ भक्तों के लिए खोल दिए गए। दो दिन बाद जैसे ही मंदिर के पट खुले भक्तों की आस्था हिलोरे लेने लगी। हर ओर गिरिराज महाराज की जयघोष हो रही थी।
सेवायतों ने गिरिराज दानघाटी मंदिर के आरती स्थल के निर्माण को तोड़े जाने के बाद विरोध में बुधवार को पट बंद कर दिए थे। दो दिन तक प्रशासन और सेवायतों के बीच गतिरोध जारी रहा। लेकिन सेवायतों ने गिरिराज जी के भक्तों की भावना को देखते हुए शुक्रवार से मंदिर के पट खोलने का निर्णय लिया।
हालांकि प्रशासन के खिलाफ आरती स्थल पर धरना-प्रदर्शन जारी है। गिरिराज दानघाटी मंदिर में पट खुलते ही सेवायत रामेश्वर पुरोहित एवं मुकुट मुखारबिंद मंदिर मानसी गंगा पर सेवायत संजय शर्मा ने मंगलाभिषेक किया। साथ ही हरिगोकुल एवं लक्ष्मीनारायण मंदिर के पट भी खोल दिए गए।
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मंदिरों के कपाट खुलते ही परंपरा में दूध-दही, शहद, गंगाजल के पंचामृत से गिरिराज जी का अभिषेक किया गया। दोपहर तीन बजे अद्भुत शृंगार में गिरिराज जी के दर्शन देखकर भक्त भावविभोर नजर आए। सेवायत रामेश्वर पुरोहित ने बताया कि वे गिरिराज जी के पुजारी हैं। वे नहीं चाहते हैं कि प्रशासन की गलती से भक्तों की भावनाएं आहत हों। सभी सेवायतों ने मिलकर गिरिराज जी के पट खोलने का फैसला किया है।
आरती स्थल पर धरने पर बैठे रहे सेवायत
लगातार दो दिन पट बंद होने पर प्रशासन ने सेवायतों से मिलकर गुरुवार की देर रात तक बैठक की। सेवायतों की मानें तो प्रशासन से उनका कोई समझौता नहीं हुआ है। गुरुवार रात उपजिलाधिकारी गोवर्धन नागेंद्र सिंह एवं तहसीलदार अजय सिंह पहुंचे। सेवायतों और प्रशासन की बैठक हुई। बाद में सेवायतों ने अपनी बैठक कर मंदिर के कपाट खोलने का फैसला किया था। सेवायतों का शुक्रवार को धरना-प्रदर्शन जारी रहा।
मंदिर प्रबंधक डालचंद चौधरी ने बताया कि प्रशासन ने आरती स्थल का निर्माण तोड़कर गलत किया है। सेवायत जितेंद्र पुरोहित ने बताया कि प्रशासन के खिलाफ लगातार प्रदर्शन जारी रहेगा। हरेकृष्ण पुरोहित, उमाशंकर कौशिक, राधा बल्लभ कौशिक, ओमप्रकाश बाबा, सुरेंद्र कौशिक, राम कौशिक, कालीचरन कौशिक, दीपक कौशिक, राजू कौशिक आदि मौजूद थे।