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अबीर-गुलाल उड़ा नहीं... दूध हो गया ‘काला’

Aligarh Updated Tue, 05 Mar 2013 05:30 AM IST
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अलीगढ़। महाशिवरात्रि और होली का त्योहार सिर पर है। इसके चलते दूध, मावा और पनीर की एक साथ मांग बढ़ रही है। जिले में दूध की जितनी डिमांड है, उतना उत्पादन नहीं है। दूध उत्पादन और डिमांड के बीच जो बहुत बड़ा अंतर है, उसको सिंथेटिक दूध से पाटा जा रहा है। यही कारण है कि सिंथेटिक दूध का कारोबार तेजी से फल फूल रहा है और कृत्रिम दूध बनाने वाले मिलावटखोर इसका लाभ उठा रहे हैं। मिलावटखोरी रोकने को एफडीए की जिम्मेदारी है, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए त्योहार के ऐन वक्त पर हाथ पांव मारे जाते हैं। उस समय छापामारी का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसका लाभ जनता को नहीं मिल पाता है और सफेद दूध का काला कारोबार करने वाले तब तक अपना उल्लू सीधा कर चुके होते हैं।
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दूध उत्पादन और डिमांड की स्थिति
कुल मवेशी
पशु चिकित्सा विभाग के आंकड़े
जनपद में कुल मवेशी - 867874
गौवंशीय - 143750
महेश वंशीय - 725124
कुल दुधारू मवेशी - 399374
गाय - 53395
भैंस - 345979
दुग्ध उत्पादन औसत पांच लीटर प्रति मवेशी 19.95 लाख लीटर प्रतिदिन
प्रति व्यक्ति औसत दूध की मांग
जनपद की आबादी 35 लाख
प्रति व्यक्ति प्रति दिन जरूरत - 500 ग्राम प्रति व्यक्ति, कुल 17.5 लाख लीटर प्रतिदिन
पांच लाख लीटर दूध बाजार की मांग
जनपद में दूध, मावा, पनीर, चाय और अन्य मिल्क प्रोडक्ट्स की प्रतिदिन मांग-लगभग पांच लाख लीटर है, जोकि त्योहार और सहालग में बढ़कर सात लाख लीटर से अधिक पहुंच जाती है।
दिल्ली की सप्लाई
ढाई लाख लीटर दूध, मावा, रबड़ी और पनीर की प्रतिदिन दिल्ली आपूर्ति
जनपद की कुल मांग - 24.50 लाख लीटर प्रतिदिन
उत्पादन - 19.95 लाख लीटर
मांग और आपूर्ति का अंतर 4.55 लाख लीटर प्रतिदिन
इस तरह प्रतिदिन 4.55 लाख लीटर कृत्रिम दूूध बाजार में खप रहा है

कैसे बनता है सिंथेटिक दूध-मिल्क प्रोडक्ट
दूूध : स्किम्ड मिल्क, वाशिंग पाउडर, रिफाइंड और ग्लूकोज मिलाकर दूध बनाते हैं
आइसक्रीम : इसमें स्किम्ड मिल्क, सेक्रीन और प्रतिबंधित रंगों का प्रयोग हो रहा है
दूध का प्रसंस्करण : फारमलीन या कास्टिक सोडा डालकर दूध कई दिन तक सुरक्षित रखा जाता है
पनीर : इसी दूध को फाड़कर पनीर की आपूर्ति हो रही है
मावा : इसी दूध से मावा और मिठाइयां भी बनती हैं
त्योहार के मद्देनजर मिलावटखोरी रोकने को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमें बना दी हैं। साथ ही मिलावटखोरी करने वालों को चिह्नित भी कर लिया है। मिलावटखोरी रोकने को पूरे जिले में तेजी से छापामार कार्रवाई शुरू की जा रही है। छापेे में निशाने पर दूध, घी, सरसों का तेल, मिठाइयां और दालें रहेंगी। - चंदन पांडेय, अभिहित अधिकारी एफडीए
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