अलीगढ़। कट्टी के लिए लाए जा रहे मवेशियों को पकड़ने पर सपाइयों और एसएसपी में ठन गई है। एक तरफ जहां एसएसपी पशु क्रूरता अधिनियम में किसी को भी न छोड़े जाने की जिद पर अड़ गए। वहीं सपाई इसे मुद्दा बनाकर दोपहर में आईजी से मिलने पहुंचे और एसएसपी की शिकायत कर दी। सपाइयों का तर्क था कि मवेशियों को तुरंत छोड़ दिया जाता तो 51 की मौत न होती। इस पर जब आईजी ने सवाल जवाब किए तो खुद सपाई ही पशु क्रूरता अधिनियम पर घिरते नजर आए, क्योंकि खुद महानगर अध्यक्ष ने स्वीकारा कि एक ट्रक में सात पशु लादकर लाने की अनुमति है और एक ट्रक में करीब 30 पशु लदे थे। आईजी ने उल्टा सवाल भी दागा और भविष्य में न्यायोचित मदद का भरोसा दिलाते हुए सपाइयों को विदा किया।
रात में हुई गरमागरमी
मथुरा की पैंठ से दस ट्रकों में इन मवेशियों को शहर के कट्टीघरों में लाया जा रहा था, जिन्हें दोपहर करीब तीन से चार बजे के मध्य पुलिस ने पकड़ा। बस तभी से सिफारिशों का दौर शुरू हुआ। नगर विधायक, कोल विधायक, सपा जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष तक ने एसएसपी से बात की। बात नहीं बनी तो रात दो बजे महानगर अध्यक्ष अज्जू इसहाक मौके पर पहुंचे। वहां से मवेशियों को सुपुर्दगी में देने की बात रखी। सपा अध्यक्ष ने सरकार का हवाला दिया तो एसएसपी ने भी तल्ख जवाब दे दिया।
बयान....
कोल विधायक हाजी जमीरउल्लाह, नगर विधायक जफर आलम और खुद मैंने एसएसपी से रात में आग्रह किया था कि गाड़ियां अगर ओवरलोड हैं तो मुकदमा कर लिया जाए, लेकिन मवेशियों को उनकी सुपुर्दगी में दे दिया जाए। मगर जिद के चलते मवेशी नहीं सौंपे गए और तकरीबन तीन दर्जन मवेशी मारे गये। इससे व्यापारियों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। अब इसका जिम्मेदार कौन है?
- अज्जू इसहाक सपा महानगर अध्यक्ष
- जो भी हुआ है नियम और कानून के दायरे में किया गया है। रात में मनमर्जी दबाव बनाकर बिना लिखा-पढ़ी के मवेशी छुड़वाने की कोशिश की गई। इससे इंकार किया तो अब शिकायत की जा रही है।
- अमित पाठक, एसएसपी
51 मवेशी दम घुटने से मरे
अलीगढ़। एसओ मडराक विपिन यादव के अनुसार इस मामले में मथुरा, आगरा, बुलंदशहर और अलीगढ़ के दस लोग पशु क्रूरता के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें मुकेश, गिर्राज, शहीद, यासीन, रिंकू, अशरफ, आरिफ, कल्लू, मनी और शाहिद शामिल हैं। एसओ के अनुसार रात में 12 बजे तक मवेशियों को उतारने और गिनती का काम चला था। मवेशी तीन-तीन लेयर में ट्रक में एक के ऊपर एक बंधे थे। रात को ही सात पशु चिकित्सकों की टीम बुला ली गई थी, जो उपचार भी कर रही है। मगर बुधवार सुबह तक 51 मवेशियों को मृत घोषित किया गया। सभी के पोस्टमार्टम में मौत का कारण दम घुटना आ रहा है। ग्रामीणों की मदद से रात और दोपहर में मवेशियों को चारा और पानी दिया गया है। पहले ये मवेशी ग्रामीणों के ही सुपुर्द किए जा रहे थे, मगर दोपहर में इनके असली मालिक ठेकेदार खरीद की रसीद आदि लेकर आए तो पशु उन्हें सौंप दिए गए।