अलीगढ़ (ब्यूरो)। स्वर्गीय ओम प्रकाश भारद्वाज चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा रामघाट रोड स्थित विक्रम कॉलोनी में चल रही श्री राम कथा के छठे दिन स्वामी विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि किसी भी पिता को मैला बालक पसंद नहीं होता। इसी प्रकार परमात्मा, जोकि सभी के पिता हैं, उन्हें मलिन हृदय, गंदा चरित्र, कलुषित विचार वाला व्यक्ति पसंद नहीं होता। परमात्मा के पास पहुंचना है तो अपने आचरण और अपनी आत्मा को शुद्ध करना होगा। इसी प्रकार मलिन स्थान, मलिन घर, गंदे शहरों आदि में ईश्वर कैसे विराजेंगे। जहां स्वच्छता होती है वहां ईश्वर विराजते हैं। राम कथा में स्वामी विजय कौशल जी ने राजा दशरथ के यहां पहुंचकर असुरों का संहार करने के लिए विश्वामित्र का राम लक्ष्मण को बुलाकर लाना और राजकुमारों के सुंदर रूप को देखकर जन्मजेय द्वारा उनकी प्रशंसा करने का प्रकरण का वर्णन किया। स्वामी विजय कौशल ने एक प्रसंग के उदाहरण सहित व्याख्या करते हुए कहा कि जहां आज्ञा से सदाचार का पालन किया जाए वह आत्मा का अनुशासन नहीं होता। वह थोपा गया अनुशासन होता है। आत्मा का अनुशासन होना चाहिए। किसी संत को देखकर कहने से उठे तो समझो थोपा गया है। स्वयं ही अगर श्रद्धा के भाव आ रहे हैं और नमन किया जा रहा है तो वह बड़ी चीज है। इसी प्रकार उन्होंने संसारी और विरक्त का भेद बताते हुए कहा कि जो भी विषय, व्यक्ति और वस्तु से जुड़ जाता है वह संसारी है। और जो इन तीनों से ऊपर उठ जाता है वह विरक्त है। यही सबसे सहज परिभाषा है। इसमें किसी प्रकार की कोई जटिलता नहीं है।