अलीगढ़। शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब, उसमें फिर मिलाई जाए थोड़ी सी शराब, होगा जो नशा यूं तैयार...वो प्यार है। प्यार को इसी तरह परिभाषित करने वाले प्रसिद्ध गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास ‘नीरज’ 4 जनवरी को उम्र के 90 वें पड़ाव पर पहुंच रहे हैं। इस मुकाम पर भी नीरज की रचनाधर्मिता का कारवां अभी भी गतिमान है। उनके जन्म दिन पर शहर की विभिन्न संस्थाएं कार्यक्रम आयोजित कर नीरज के लंबे साहित्यिक सफर को याद कर रही हैं।
1924 को इटावा के गांव इकदिल में पैदा हुए नीरज के जीवन की शुरुआत बेहद संघर्षपूर्ण रही। काव्य जगत में गीत और फिल्मों के गीतों में कवित्व को जिंदा रखने वाले नीरज के दर्जनों गीत संग्रह प्रकाशित हुए और अभी भी बेहद लोकप्रिय हैं। फिल्मों में भी नीरज ने सवा सौ से ज्यादा गीत लिखे जो आज भी बेहद लोकप्रिय हैं। देवानंद, राजकपूर, मनोज कुमार, राजेंद्र भाटिया, रोशन, शंकर जयकिशन, एसडी बर्मन के साथ नीरज की जोड़ी खूब जमी। नीरज के गीतों में लालित्य है, संगीत है, सूक्ष्म मानवीय संवेदनाएं हैं तो सामाजिक विसंगतियों पर कठोर प्रहार भी है। साथ ही मानवीयता के लिए संदेश भी है।