अलीगढ़। जिलाधिकारी राजीव रौतेला और कोल विधायक हाजी जमीरउल्लाह के बीच हुई तनातनी अब राजनीतिक रंग ले चुकी है। डीएम के रवैये से आहत प्रधानाें में अब सपा को अपने उलझे चुनावी समीकरण सुलझते दिखाई दे रहे हैं। किसी भी कीमत पर पार्टी इन प्रधानों के सहारे अपनी सोशल इंजीनियरिंग को गियरअप करना चाहती है। इसलिए डीएम की मुश्किलें बढ़ना तय है।
मुस्लिम विधायक के नेतृत्व में जिला प्रधान एसो. के अध्यक्ष महेंद्र कुमार यादव का साथ होना ही पार्टी के लिए बड़ा मायने रखता है। मुस्लिम आैर यादव दोनों सपा के लिए क्या मायने रखते है यह किसी से छिपा नहीं है। इन दोनों के नेतृत्व में जाट, एससी, ब्राह्मण, ठाकुर, लोधी-राजपूत, बघेल, सहित सभी धर्म और जातियाें के प्रधान भी शामिल हों तो क्या कहने..? सपा मुजफ्फरनगर दंगों से नाराज जाट समुदाय को इस प्रकरण के सहारे लुभा सकती है। 200 प्रधानों में भी करीब एक एक दर्जन जाट प्रधान शामिल हैं। 200 प्रधानों के कुल वोट बैंक का आकलन करें तो यह आंकड़ा ढाई से पौने तीन लाख तक है। सीएम अखिलेश यादव और कद्दावर कबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव से मिलकर वापस लौटे प्रधानों ने कहा है कि उनको सपा सरकार से इंसाफ का भरोसा है। बहरहाल, विकास योजनाओं में धन की कमी और बढ़ते अपराधों के सवालों से घिरी सपा के लिए लोकसभा चुनाव 2014 प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। वो ऐसे मौके को खोना नहीं चाहेगी।