अलीगढ़। 34 से 36 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचे दूध के दाम से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लेकिन अब तक जिला प्रशासन ने इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया है। जिले में दूध ही नहीं खाने-पीने की दूसरी चीजों के दाम भी बेतहाशा बढ़ते जा रहे हैं, जिस पर कहीं कोई मूल्य नियंत्रण प्रणाली काम नहीं कर रही है। ब्रांडेड कंपनियों के दूध के रेट और उनकी ओर से पशुपालकों से खरीदा जाने वाला महंगा दूध महंगाई का कारण बताया जा रहा है, लेकिन इसकी जांच कहीं नहीं हो रही है। जिससे दूधिए मनमाने ढंग से पूरे बाजार में दूध का रेट बढ़ा रहे हैं, खास बात यह है कि गुजरे कुछ सालों में कभी भी एक रुपये लीटर कम तो नहीं हुआ है, लेकिन रेट बढ़ा जरूर है। दूध सहित अगर खाने-पीने की दूसरी चीजों के दामों पर भी कहीं कोई चेकिंग हो तो बेमतलब की महंगाई से जनता को बड़ी राहत मिल सकती है।
इससे पहले जिला प्रशासन ने आलू और प्याज की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी पर उप मंडी निदेशक ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन के नेतृत्व में प्याज के थोक कारोबारियों से वार्ता कर इसके दामों पर कुछ कमी करा दी थी। यही नहीं इसकी निगरानी शुरू होने के बाद प्याज के रेट फुटकर बाजार में भी कम हुए थे। यह बात तय है कि अगर जिला प्रशासन मूल्य नियंत्रण प्रणाली को सख्ती से लागू करे तो आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती है। वर्तमान में नुमाइश और लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे जिला प्रशासन के अधिकारी इस जिम्मेदारी बच नहीं सकते। महंगाई से त्रस्त जनता के लिए इस कदम को उठा कर प्रशासन सभी को बड़ी राहत दे सकता है।