अलीगढ़। गुरुवार की दोपहर एकाएक मौसम ने अपना रुख बदल दिया। चिलचिलाती धूप की जगह आसमान में घटाएं छा गईं। थोड़ी देर पहले शरीर को झुलसा रहे गर्म हवा के थपेड़े ठंडी हवा में बदल गए। देखते ही देखते बूंदाबांदी शुरू हो गई। बारिश के साथ कुछ जगह छोटे-छोटे ओले भी गिरने लगे। इसी के साथ हवा ने 54 किमी की रफ्तार पकड़ ली। लहराते पेड़ हवा के साथ उखड़ने लगे। होर्डिंग और तिरपाल हवा में उड़ते हुए दिखाई देने लगे। मौसम के जलजले को देख सड़कों पर सन्नाटा छा गया।
गुरुवार को भी अधिकतम तापमान में कोई कमी नहीं थी। तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक पर बरकरार था। लेकिन भारी उमस के चलते धूप की तपिश महसूस नहीं हो रही थी। दोपहर में उमस के चलते शरीर चिपचिपा रहे थे। जरूरी काम के चलते घरों से बाहर निकले लोग बैचेनी महसूस कर रहे थे।
लेकिन दोपहर होते-होते बादल छा गए थे। चारों ओर अंधेरा सा छा गया। वाहनों की हैड लाइट जलने लगी। बहुत सारे वाहन सड़कों के किनारे खड़े गए। दोपहर दो बजे से तेज हवाएं चलनी शुरू हो गईं थी। जिन्होंने बाद में बारिश संग रफ्तार पकड़ ली। मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो 54.30 किमी की रफ्तार से आई आंधी ने सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया।
रानी लक्ष्मीबाई मार्ग के पास वजीर मंजिल में बने एक मकान पर पेड़ गिर पड़ा। कमरे की छत को तोड़ता हुआ पेड़ अंदर तक लटक गया। घर में बैठे छोटे-छोटे बच्चे बाल-बाल बच गए। कमरे में रखा सामान टूट गया। स्टेडियम में भी तेज हवा के चलते दीवार गिर गई। खेलकूद के दौरान लगाए गए टैंट-तंबू उखड़ गए।
आंधी में सर्कस के पंडाल का भी कुछ हिस्सा हवा में उड़ गया। मैरिस रोड सहित शहर के कई इलाकों में टूटे और जड़ से उखड़े हुए पेड़ मौसम के रौद्र रूप की कहानी बयां कर रहे थे। मौसम विज्ञानियों की मानें तो आंधी का असर आधे घंटे तक रहा। मौसम का बिगड़ा रूप देखकर लोग सिहर गए। जो जहां था वहीं रुक गया। आधा से पौन घंटे तक सड़क पर सन्नाटा पसरा रहा।
अब न्यूनतम तापमान ने दिखाए तेवर
कई दिन के बाद गुरुवार को अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई थी। बारिश और तेज हवाओं से पहले अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। अधिकतम तापमान कम हुआ तो न्यूनतम तापमान ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए और वह 30.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुँच गया। जो सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक था।