अलीगढ़। जेएन मेडिकल कॉलेज में 12 दिन की नवजात को जो मां छोड़कर गई, वह इतनी बेबस और लाचार है कि उसके मातृत्व पर गरीबी भारी पड़ रही है। वह चाहते हुए भी बच्ची को बस यह सोचकर छोड़ आई कि पहले से आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। अब इसके जन्म पर डॉक्टर दवा खरीदकर लाने का दबाव बना रहे हैं। इसके लिए रुपया कहां से आएगा। मगर कई दिन से जब बच्ची का फोटो अखबाराें में प्रकाशित हुआ तो रविवार को दंपति बच्ची वापसी की चाहत में इधर उधर भटकते हुए मीडिया कर्मियों के संपर्क में आए। अब सोमवार को वह अधिकारियों से बच्ची वापसी का अनुरोध करेंगे।
खैर के गांव नहरौला निवासी शहजादी पत्नी छोटे की दास्तां सुनें तो उस पर पहले से छह बच्चों में चार बेटी व दो बेटे हैं। सबसे बड़ा बच्चा 12 साल का है। पति गांव में ही मजदूरी करता है। पिछले माह झोंपड़ी में आग लग गई, जिसके चलते रहना-खाना भी मुश्किल हो गया। पति दिन में सौ-दो सौ रुपये जो भी कमाकर लाता, उससे रोटी ही पूरी हो पाती। कर्जा आदि लेकर दूसरी झोंपड़ी का इंतजाम किया। इसी बीच महिला गर्भवती थी। मगर आर्थिक तंगी व परेशानी के चलते तबियत बिगड़ने पर उसे जेएन मेडिकल कॉलेज में भरती कराया। जहां प्री मैच्योर डिलीवरी के कारण तमाम तरह की महंगी दवाओं की जरूरत पड़ी। इस पर छोटे महिला व बच्ची को छोड़कर यह कहकर चला गया कि रुपयों का इंतजाम करके लाता है। जब वह नहीं लौटा तो पड़ोसी बेड वाले तीमारदार की मदद से उसने पति का फोन मिलवाया। उधर से जवाब मिला कि रुपयों का इंतजाम नहीं हो रहा। इस पर महिला चुप हो गई और काफी सोच विचार के बाद यह सोचकर बच्ची को छोड़कर चली आई कि इससे तो यह न पैदा होती तो ही ठीक होता।
बच्ची को वहां छोड़कर घर पहुंच गई और दंपति शांत होकर बैठ गए। मगर कहते हैं कि मातृत्व तो कभी भी फूट पड़ता है। तीन दिन तक बच्ची का फोटो और अपना नाम अखबार में पढ़ा तो महिला से रहा नहीं गया और रविवार को वह मीडिया कर्मियों के संपर्क में आई। अब सोमवार को अधिकारियों से अनुरोध करेगी कि उसकी बच्ची वापस कराई जाए। इस दौरान महिला का कहना था कि मेडिकल में डॉक्टर दवा के लिए दबाव बना रहे थे और न ला पाने की स्थिति में भला-बुरा भी कह रहे थे। इसलिए मजबूरी में वहां से चली आई।
----
-यह आरोप गलत है। महिला के डिलिवरी के बाद से अब तक पूरा उपचार व दवा आदि का इंतजाम मेडिकल कॉलेज द्वारा किया जा रहा है। अगर ऐसा न होता तो फिर अब तक बच्ची को सुरक्षित रख पाना भी मुश्किल होता।
-डॉ.तारिक मंसूर प्राचार्य जेएन मेडिकल कॉलेज