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सरकारी पानी पर दंबगों का ‘कब्जा’

Aligarh Updated Mon, 07 Jul 2014 05:30 AM IST
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अलीगढ़ /अतरौली/ जट्टारी। जिले में सरकारी हैंडपंपों के पानी पर ‘दबंगों ’ ने कब्जा कर रखा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के इंतजाम पहले से ही ऊंट के मुंह में जीरा जैसे हैं, ऐसे में नलों पर कब्जा होने से कमजोर और गरीब ग्रामीणों के लिए स्थिति और भी जटिल हो जाती है। गरीबों के पानी पर डाका डालने वालों के खिलाफ प्रशासनिक तंत्र मौन है। ग्राम प्रधान हो अथवा ग्राम पंचायत अधिकारी कोई देखने वाला नहीं है। सरकारी हैंडपंप लगाने में मानकों तक का पालन नहीं हो रहा है। निरीक्षण हो रहे हैं लेकिन अधिकारियों को यह ‘अनर्थ’ नहीं दिखाई दे रहा है। यह सब जिले के प्रभारी मंत्री राजकिशोर सिंह के सामने भी उठा, उस दौरान मौजूद प्रभारी सीडीओ रामनरेश ने इस मामले को दिखवाकर कार्रवाई करवाने की बात जरूर कही थी।
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जट्टारी क्षेत्र के क्षेत्र के गांव भरतपुर बझेड़ा में करीब दो दर्जन सरकारी हैडपंप लगे हुए हैं। जिनमें से आधा दर्जन हैडपंप तो खराब पड़े हुए हैं। उसके बाद के अधिकांश हैंडपंपों पर लोगों ने सबमर्सिबल लगा कर निजी संपत्ति बना दिया है। इसमें गांव के निरीह लोग पिस रहे हैं। हालत कितने भया भय हैं ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि व पति अजय चौहान इसे गलत तो बताते हैं लेकिन किसी भी हैंडपंप से सबमर्सिबल हटाने में ख्ुाद को असमर्थ बताते हैं। उनका कहना था कि गांव में राजनीतिक माहौल के कारण मैं इस मामले में कुछ भी नहीं कर सकता।

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लोहिया गांवों में उड़ रहीं धज्जियां
हैंडपंप लगाने में अनियमितता और मानकों की अनदेखी किसी को देखनी है तो अतरौली क्षेत्र के लोहिया ग्राम रामपुर गोसाई चले जाएं। यहां बीस मीटर के दायरे में ही चार-चार नल लगा दिए हैं। यहां 18 सौ की आबादी है और 22 नल लगे हैं। हालांकि पांच नल खराब पड़े हुए हैं। वहीं इस ग्राम पंचायत के मजरा मधूपुर में आबादी तो करीब इतनी ही है लेकिन हैंडपंप आधे ही हैं। क्षेत्र में कहीं-कहीं कहीं तो दो नलों के बीच में मात्र खरंजा भर की दूरी है।
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गड़बड़ी ही गड़बड़ी
हैंडपंप लगाने और उनके रख रखाव में इतनी गड़बड़ियां हो रही हैं उनको गिना नहीं जा सकता है। अमर उजाला की टीम खानपुर गांव पहुंची तो वहां एक हैंडपंप से भैंस बंधी हुई थी। वहीं एक अन्य गांव में हैंडपंप तो लगा दिया लेकिन उसका चबूतरा नहीं बनाया गया है।
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