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तो फिर दूधिया रोशनी से जगमगाएगा शहर

Aligarh Updated Sat, 20 Sep 2014 05:30 AM IST
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सोडियम और ट्यूबलाइट को बाय -बाय, हर पोल पर एलईडी लाइट
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स्ट्रीट लाइट पर फुंकने वाली तीन चौथाई बिजली की होगी बचत
करोड़ों के प्रोजेक्ट पर नगर निगम को नहीं करनी है फूटी कौड़ी खर्च
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एक नजर में स्ट्रीट लाइट

अलीगढ़। स्ट्रीट लाइट के नाम पर अंधेरे में डूबा रहने वाला शहर, अब दूधिया रोशनी से जगमगाएगा। मुख्य बाजार, विभिन्न मार्ग से लेकर मुहल्लों के गली कूचों में स्ट्रीट लाइट के लिए लगीं हाईमास्ट, सोडियम व ट्यूबलाइट को हटाकर उनके स्थान पर एलईडी लाइट लगाने की तैयारी है। करोड़ों के इस प्रोजेक्ट पर नगर निगम को फूटी कौड़ी खर्च नहीं करनी है। एक सरकारी उपक्रम इस योजना को अंजाम देगा। यही नहीं एलईडी लाइट लगाने के बाद उसका रखरखाव भी कंपनी ही करेगी। इससे स्ट्रीट लाइट पर खर्च होने वाली तीन चौथाई बिजली की महाबचत होगी। जो बिजली बचेगी, उसकी कीमत के बराबर की धनराशि का भुगतान नगर निगम हर माह सरकारी कंपनी को करेगा। इस तरह से नगर निगम को स्ट्रीट लाइट के नाम पर फायदा ही फायदा है और शहर रात में एकदम ज़गमग रहेगा।
एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लि. (ईईएल) का प्रस्ताव है कि कंपनी की ओर से बिजली बचाने के लिए खासे प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत कंपनी के स्तर से पूरे शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को बदलकर एलईडी लाइट व्यवस्था दी जाएगी। एलईडी लाइट लगने के बाद नगर निगम का जो बिजली का लोड 1251 किलोवाट का है वह घटाकर मात्र 300 किलोवाट रह जाएगा। जाहिर सी बात है कि स्ट्रीट लाइट के बिल के रूप में नगर निगम जो 40 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च करता है, वह घटकर 10 लाख रह जाएगा। साथ ही पूरा शहर दूधिया रोशनी में नहा जाएगा। नगर निगम को इस व्यवस्था से 30 लाख रुपये प्रतिमाह की जो बचत हो रही है, उस राशि का भुगतान हर माह कंपनी को किया जाएगा। भुगतान की प्रक्रिया जब तक जारी रहेगी तब तक कंपनी का एलईडी स्ट्रीट लाइट सिस्टम पर जो खर्च हुआ है, वह बराबर नहीं हो जाता है। कंपनी नगर निगम के साथ एग्रीमेंट करेगी कि एलईडी सिस्टम को चालू करने के बाद कितने साल तक उसका रखरखाव करेगी। नगर आयुक्त इसको लेकर कंपनी के अधिकारियों के बराबर संपर्क में हैं।
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एलईडी लाइट लगाने को लेकर कंपनी से वार्ता चल रही है। कंपनी ने अपना प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्ताव का अध्ययन कर कंपनी के अधिकारियों को अतिशीघ्र आमंत्रित किया जाएगा। कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद निर्णय ले लिया जाएगा। हालांकि कंपनी सरकारी उपक्रम है, लेकिन अन्य विकल्प खुला रखने के लिए टेंडर भी आमंत्रित कर लिए जाएंगे। यदि किसी अन्य कंपनी के टेंडर आते हैं तो देखा जाएगा अन्यथा ईईएल के प्रस्ताव को ही मान लिया जाएगा।
शैलेंद्र कुमार सिंह, नगर आयुक्त
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