अलीगढ़। मनरेगा और ग्राम निधि के चार लाख रुपयों का दुरुपयोग करने के मामले में प्रथम दृष्टया प्रधान और पंचायत सचिव को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
पिछले दो साल के दौरान मनरेगा, राज्य वित्त आयोग, 12 वें वित्त आयोग और ग्राम निधि के लिए आठ लाख रुपये विकास के लिए मिले थे। इस राशि से पंचायत में खुली बैठक कर प्रस्ताव पास कराने के बाद ही निर्माण और विकास कार्य कराए जाने थे लेकिन नहीं हुए।
यह आरोप ग्रामीणों ने तहसील दिवस और अन्य माध्यम से डीेएम को शिकायत करके लगाए थे। शिकायत पर जांच कराई गई, जिसमें करीब चार लाख रुपये के अनियमित भुगतान और गड़बड़ी किए जाने की प्रथम दृष्टया पुष्टि हुई है। इसी आधार पर जांच अधिकारी ने यह रिपोर्ट सीडीओ को सौंपी थी। इस मामले में सीडीओ ने पीडी से ब्योरा मांगा है कि प्रधान और सचिव के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाए। पीडी की रिपोर्ट के आधार पर प्रधान और सचिव के खिलाफ कार्रवाई होगी।