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... जरा हंस के कह दो तुम से ही मुहब्बत है

Aligarh Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
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अलीगढ़। बाबा बरछी बहादुर के 101वें सालाना उर्स के मौके पर रविवार को देश के मशहूर कव्वालों ने बाबा की शान में कव्वाली पेश की। इसे सुनकर बड़ी संख्या में मौजूद श्रोता देर रात तक झूमते रहे।
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कानपुर के प्रसिद्ध कव्वाल शरीफ परवाज ने अपना मशहूर कलाम ‘ला इलाहा इल्लाह मुहम्मदुर रसूलअल्लाह’ पेश किया। उसके बाद ख्वाजा गरीब नवाज और बाबा बरछी बहादुर की शान में बेहतरीन कव्वाली पेश की गईं। मेरठ से आए कव्वाल खलील साबरी ने मौला अली की शान में हजरत अमीर खुशरू का कोल पेश किया। उसके बाद उन्होंने बाबा की शान में ‘दिल के बहलने की एक ही सूरत है जरा हंस के कह दो तुम से ही मुहब्बत है..’ कव्वाली पेश कर श्रोताओं का झूमने पर मजबूर कर दिया। बाराबंकी देवा शरीफ के गुलाम वारिस के कलाम को श्रोताओं ने खूब सराहा। इस अवसर पर दरगाह कमेटी के सचिव नूर मोहम्मद, गुलाम हबीब पेंटर, मौलाना हाफिज, सूफी बहार मियां, हैदर अली समेत काफी संख्या में श्रोता मौजूद थे।
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