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पिंडदान करके एक हजार और बने संन्यासी

Allahabad Updated Wed, 13 Feb 2013 05:30 AM IST
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महाकुंभ नगर। पंचदशनाम जूना अखाड़ा की ओर से मंगलवार को फिर तकरीबन एक हजार ‘महापुरुषों’ को दीक्षा देकर संन्यासी बनाया गया। इससे पहले अबकी महाकुंभ में 2700 महापुरुषों को दीक्षा देकर संन्यासी और मौनी अमावस्या पर नागा बनाया गया था। संन्यास की दीक्षा के पहले अपने अपने गुरुओं के आश्रम में पंच संस्कार के बाद उन्हें महापुरुष बनाया गया था। पहले दौर में तकरीबन डेढ़ हजार और दूसरे में बारह सौ महापुरुषों ने पिंडदान कर संन्यास लिया था।
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तीर्थपुरोहित संतोष मिश्र और संजय बधेका की देखरेख में गंगा का तट हर-हर महादेव के जयकारों के बीच महापुरुषों ने अपना पिंडदान किया। वस्त्र त्याग कर लंगोटी देने से शुरुआत के बाद मुंडन और स्नान कराया गया। नई लंगोटी पहनाकर उन्हें पलाश का दंड तथा मिट्टी के कुल्हड़ का कमंडल देकर दंडी संन्यासी का स्वरूप दिया गया। फिर पुरोहितों ने जनेऊ पहनाकर शरीर पर मलने को भभूत दिया। दंड के लिए पलाश की डंडी और शरीर पर मलने के लिए भभूत भी काशी विश्वनाथ मंदिर से लाया गया था।
अखाड़े की छावनी में विजयहवन संस्कार से पहले जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने नए बने संन्यासियों को संन्यास का उद्देश्य और इसकी मर्यादाओं से परिचित कराया। भगवान दत्तात्रेय के सामाने ‘विजयाहवन’ में उन्हें मंत्र की दीक्षा दी गई। इससे पहले उन्होंने चौबीस घंटे का व्रत रखा। संन्यास दीक्षा में अखाड़े के श्रीमहंतों, सचिवों आदि ने मौजूदगी दर्ज कराई। कोतवालों ने व्यवस्था संभाली।
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0 धर्म संसद आज, कई फैसले होंगे
महाकुंभ नगर। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के सेक्टर सात, भारद्वाज चौराहा स्थित जगद्गुरु पंचानंद गिरि के शिविर में बुधवार को सुबह दस बजे धर्मसंसद का आयोजन किया जाएगा जिसमें आतंकवाद, नक्सलवाद, धर्म परिवर्तन सहित चौंतीस बिंदुओं पर विमर्श किया जाएगा।
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