गलत जवाब के मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग लगातार घिरता जा रहा है। पीसीएस-2016 प्रारंभिक परीक्षा ही नहीं इससे पूर्व की कई अन्य परीक्षाओं के रिजल्ट पर भी सवाल उठ चुके हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर पीसीएस-जे 2013 का रिजल्ट आयोग को बदलना पड़ा था तो 2015 का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में है। इनके अलावा पीसीएस, लोअर सबऑर्डिनेट समेत कई अन्य परीक्षाओं के रिजल्ट को भी अभ्यर्थियों ने इसी आधार पर न्यायालय में चुनौती दी है। न्यायालय के इस आदेश से आयोग की कार्यपद्धति पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पीसीएस-जे 2013 प्रारंभिक में गलत जवाब को लेकर हाईकोर्ट ने रिजल्ट संशोधित करने का आदेश दिया था। इसके बाद आयोग ने परिणाम संशोधित किया था। पीसीएस-जे 2015 प्रारंभिक परीक्षा के दो प्रश्नों के जवाब को गलत बताते हुए हाईकोर्ट ने रिजल्ट संशोधित करने का आदेश दिया था। चूंकि मुख्य परीक्षा भी हो चुकी थी, इसलिए आयोग ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी आना है।
हालांकि, इस भर्ती का अंतिम परिणाम घोषित हो चुका है। इससे पहले इसी आधार पर समीक्षा अधिकारी-सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ-2013) प्रारंभिक परीक्षा में न्यायालय ने आयोग के चेयरमैन को तलब किया था। अब यह मामला सुप्रीमकोर्ट में है। गलत जवाब को लेकर पीसीएस-2014 और लोअर सबऑर्डिनेट-2013 प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को भी अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
पीसीएस, लोअर की जल्द सुनवाई की होगी मांग
इलाहाबाद (ब्यूरो)। पीसीएस-2016 के आदेश को आधार बनाते हुए प्रतियोगियों ने अन्य परीक्षाओं को लेकर दायर याचिका पर भी जल्द सुनवाई की मांग की है। इसके लिए प्रतियोगी न्यायालय जाएंगे। गलत जवाब को आधार बनाते हुए अभ्यर्थियों ने पीसीएस-2014 और लोअर सबऑर्डिनेट-2013 के प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को भी चुनौती दी है। हालांकि, इनके फाइनल रिजल्ट घोषित हो चुके हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि हाईकोर्ट के शुक्रवार के आदेश को आधार बनाते हुए न्यायालय से इन दो भर्तियों पर भी जल्द सुनवाई की मांग की जाएगी।
गलत जवाब पर पीसीएस-2016 प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित करने के हाईकोर्ट के आदेश से प्रतियोगियों में उत्साह है। आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग तथा अन्य परीक्षाआें के परिणाम पर आपत्ति उठाते हुए आंदोलनरत प्रतियोगियों ने कानूनी लड़ाई और तेज करने की घोषणा की है।
गलत जवाब, परीक्षा में गड़बड़ी, पक्षपात समेत विभिन्न बिंदुओं को आधार बनाते हुए प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई है। इनके अलावा कई अन्य लोगों की ओर से भी याचिकाएं दाखिल की गईं हैं। पीसीएस-2016 के परिप्रेक्ष्य में न्यायालय के आदेश से प्रतियोगियों को बल मिला है। मोर्चा की ओर से हाईकोर्ट के इस आदेश को सीबीआई जांच की याचिका में शामिल किया जाएगा। समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि आयोग की भर्तियों में अनियमितता की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। हाईकोर्ट के आदेश से सीबीआई जांच की उनकी मांग को मजबूत आधार मिला है।
लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षाओं की उत्तर कुंजी जारी करने की मांग और तेज होगी। कई प्रश्नों के गलत जवाब को आयोग की ओर से सही माने जाने की शिकायत विगत पांच वर्ष से अधिक है। यह तीसरा मौका है जब इस मामले में आयोग को न्यायालय से झटका लगा है। इससे मुख्य परीक्षा में भी उत्तर जारी करने की प्रतियोगियों की मांग को बड़ा आधार मिला है।
पीसीएस मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र वस्तुनिष्ठ आधारित होते हैं। इसके अलावा लोअर सबऑर्डिनेट, आरओ-एआरओ में भी सामान्य अध्ययन के पेपर वस्तुनिष्ठ आधारित होते हैं। प्रतियोगियों का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा में गलत जवाब को सही माने जाने की शिकायत लगातार हुई है। प्रतियोगी यह भी आरोप लगाते रहे हैं कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए आयोग की ओर से ऐसी गलती जानबूझकर की जाती है। उनका कहना है कि इस तरह की गलती मुख्य परीक्षा में भी होती है, लेकिन आयोग की ओर से उत्तर कुुंजी जारी नहीं की जाती।
इसकी वजह से उन्हें यह मालूम नहीं हो पाता कि आयोग ने किन विकल्पों को सही जवाब माना है। ऐसे में वे आपत्ति भी दर्ज नहीं करा पाते। मुख्य परीक्षा की वस्तुनिष्ठ आधारित प्रश्नपत्रों की भी उत्तर कुंजी जारी करने की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति, भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा समेत अनेक संगठनों की ओर से आयोग में अनेकों पर ज्ञापन सौंपा जा चुका है। प्रतियोगियों का कहना है कि हाईकोर्ट के शुक्रवार के आदेश के परिप्रेक्ष्य में मुख्य परीक्षा की उत्तर कुंजी जारी करने की मांग का ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके विपरीत आयोग के अफसर इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं।
आयोग को पीसीएस-2011 प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम भी संशोधित करना पड़ा था। हालांकि, उस बार गलत जवाब का मामला नहीं था। आयोग ने पीसीएस-2011 में त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था लागू कर दी थी। इसके विरोध में प्रतियोगियों ने प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाया था। इस पर प्रदेश सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था। इसके बाद त्रिस्तरीय आरक्षण का आदेश वापस ले लिया गया। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम भी संशोधित करना पड़ा।