यूं तो सैर-ए-गुलशन को कितने लोग आते हैं, फूल कौन तोड़ेगा डालियां भी समझती हैं। किसी शायर का यह शेर फूलों के कारोबार पर सटीक बैठता है। जिन फूलों की पूछ पिछली सहालग में बहुत कम हो गई थी अब सहालग में चुनाव पड़ने से कई गुना बढ़ गई है। मांग पूरी करना भी मुश्किल पड़ रहा है।
चुनाव चाहे लोकसभा का हो या फिर विधानसभा का। आचार संहिता लगती है बाजार में कहीं चहल-पहल तो कहीं सन्नाटा नजर आने लगता है। इस बार तो नोटबंदी ने पहले ही कारोबार पर ब्रेक लगा रखा था। इसी बीच शुरू हो गई चुनावी बयार। चुनाव में सियासी पारा चढ़ते ही फूल कारोबारियों की भी बल्ले बल्ले हो गई। प्रत्याशियों के लिए माला से लेकर जनसंपर्क के लिए फूलों की डिमांड बढ़ गई है। चुनाव के कारण फूलों की इतनी मांग है कि फेस्टिवल सेल भी पीछे रह गई।
जनसभाओं के लिए भी खूब मालाओं की जरूरत पड़ रही है। इतना ही नहीं उम्मीदवार जब किसी गांव में प्रचार करने जाते हैं तो वहां भी उनका स्वागत माला-फूल से ही होता है। ऐसे में गांव से लेकर शहर तक फूलों की मांग बढ़ गई है।
शादी-विवाह का सीजन भी साथ
फूल कारोबारियों की मानें तो हम लोग तो हर मौसम में खाली बैठे रहते हैं। शादी-विवाह का सीजन आता है तो फूल-मालाओं की मांग बढ़ती है। इसी कमाई से साल भर का खर्च निकाल लेते हैं। फूल व्यापारी गोलू व जितेंद्र सैनी ने बताया कि जिले में फूलों की कोई मंडी नहीं है। हम लोग कानपुर से फूल मंगवाते हैं। वहां से आने वाले फूलों से शादी-विवाह के वाहनों, घरों को सजाते हैं। इस समय तो नेता लोगों को भी इसकी जरूरत है।
दो क्विंटल रोज आ रहा फूल
फूल व्यापारियों ने बताया कि इस समय 70 से 80 किलो गुलाब व डेढ़ क्विंटल तक गेंदा व अन्य फूल आ रहा है। रोज दो क्विंटल फूल बिक रहा है। जिसमें 20 से 30 रुपये के बीच गेंदा की माला तो गुलाब का फूल बीस रुपये तक बिक रहा है।