बागपत। रमाला के गांव गोपालपुर खड़ाना से लापता हुए बच्चे को कोई बंगलूरू उठाकर ले गया था। साढ़े नौ साल का जितेंद्र वहां खुद नहीं पहुंचा था। जितेंद्र बोल नहीं पाता है, लेकिन शनिवार को उसने इशारों-इशारों में आपबीती सुनाई। उससे बंगलूरू में आरा मशीन पर काम करवाया गया। उसे बांधकर रखा जाता था। बंगलूरू की पुलिस इस मामले में पड़ताल करेगी।
जितेंद्र इसी साल 2 अगस्त को गांव गोपालपुर खड़ाना से लापता हुआ था। डेढ़ महीने बाद वह बंगलूरु में वहां की बाल कल्याण समिति को वहां मिला था। उसके हाथ पर जितेंद्र, बागपत लिखा है। ये देखकर समिति ने बंगलूरू पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। पुलिस ने बागपत की बाल कल्याण समिति से संपर्क किया। यहां उसके मां-बाप का पता लगाया गया। जब पता मिल गया तो शनिवार को उन्हें बच्चा सौंप दिया गया। समिति के सदस्यों और सीओ बागपत रजनी गोयल की मौजूदगी में इस बच्चे ने इशारों में बताया कि उससे आरा मशीन पर काम कराया जाता था। उसे ट्रेन में जबरन बंगलूरू ले जाया गया। वहां एक जंजीर से बांधकर उसे रखा गया, लेकिन वह यह नहीं समझा पाया कि वह छूटा कैसे। बागपत बाल कल्याण समिति की सदस्य सरिता जिंदल और संजय गोयल ने बताया कि वे इस मामले में बंगलूरू पुलिस को जांच के लिए लिखेंगे।
ऐसे समझाई अपनी बात
जितेंद्र से पूछा गया कि वह बंगलूरू कैसे पहुंचा तो कुछ बता नहीं पाया। फिर उससे सवाल किया कि क्या उसे कोई ले गया था? तो उसने हाथ से इशारा करके बताया कि लाठी के बल पर उसे ले जाया गया था। इसके बाद उसने हाथ को मेज पर चलाकर समझाया कि उससे काम कराया जाता था। इस पर सीओ ने कहा, क्या आरा मशीन पर काम किया? तो उसने गरदन हिलाकर हां में जवाब दिया।