बागपत। करोड़ों के फर्जी एफडी घोटाले के रहस्य से परदा उठाने में पूरी तरह नाकाम रही पुलिस अब इस गोलमाल की जांच आर्थिक अनुसंधान शाखा (ईओडब्लू) से कराना चाहती है। इसके लिए एसपी ने शासन को संस्तुति कर दी है। अगर ईओडब्लू को जांच चली जाती है, तो घोटाले के कई राज सामने आ सकते हैं।
सबसे अहम सवाल यह बना हुआ है कि इतना बड़ा घोटाला बाबू सुरेंद्र ने अकेले दम पर अंजाम दिया या फिर इसमें और भी लोग शामिल रहे। पुलिस उससे दो दिन पूछताछ करके भी इस बारे में कुछ मालूम नहीं कर पाई थी। इसके अलावा यह भी चौंकाने वाली बात है कि करोड़ों के घोटाले में रिकवरी चवन्नी की भी नहीं है।
पुलिस को यह भी मालूम करना था कि सुरेंद्र ने घोटाले की रकम कहां ठिकाने लगाई, लेकिन इसमें भी नाकामी मिली। एसपी राजू बाबू सिंह ने बताया कि घोटाले की जांच के लिए ईओडब्लू से जांच की संस्तुति शासन से की गई है।
दूसरी ओर, पुलिस तीन-चार दिन में ही मेरठ के रजिस्ट्रार ऑफिस से बैंक स्टाफ ऋण समिति का पूरा रिकार्ड लेने के लिए जाएगी। इस समिति के नाम पर ही करोडो़ं की फर्जी एफडी जारी की गई। रिकार्ड से मालूम चलेगा कि समिति के अध्यक्ष, सचिव, सदस्य कौन-कौन हैं? इन पर भी शिकंजा कसा जा सकता है। इस घोटाले में एक और नई बात यह सामने आ रही है कि बैंक खाताधारकों के खाते से धोखाधड़ी से पैसा निकाला गया। यह काम एक शख्स के बसका नहीं है। इससे लग रहा है कि घोटाले में और भी लोग शामिल रहे। अगर जांच ईओडब्लू को जाती तो है इनके नाम सामने आना मुमकिन है।