बागपत। बेखुदी बेसबब नहीं है गालिब, कुछ तो है जिसकी परदादारी है... पावला बेगमाबाद गांव में हुए बवाल के मामले में पुलिस का अचानक से खामोश हो जाना हैरान कर रहा है। जो अफसर बलवाइयों पर एनएसए तक लगाने की बात कर रहे थे, वे अब मुल्जिमों की गिरफ्तारी कराने तक पर जोर नहीं दे रहे। कहीं ऐसा तो नहीं कि वोटों के खेल में राजनीति के खिलाड़ियों ने पुलिस के हाथ बांध दिए हों? तीन चार दिन से पुलिस नामजद आरोपियों के घर दबिश भी देने नहीं जा रही है।
पावला बेगमाबाद में 21 अप्रैल की रात बवाल हुआ था। शाहबुद्दीन के घर पर हमला किया गया था। इसके बाद गांव में सांप्रदायिक तनाव हो गया था। उस समय तो पुलिस के हाथ पांव फूले हुए थे। एसपी तक घंटों गांव में रहे। अगले दिन भी पुलिस ने छाती ठोककर कहा कि बलवाइयों पर एनएसए भी लगाया जाएगा। इसके बाद दोनों पक्षों के हिमायती पुलिस अफसरों से मिले। ये लोग राजनीति से ताल्लुक रखने वाले हैं। इसके बाद ही अफसरों का रवैया अचानक से बदला। नौबत यहां तक आई कि शाहबुद्दीन के परिवार को थाने पर प्रदर्शन करके धमकी देनी पड़ी कि अगर मुल्जिम नहीं पकड़े गए तो वे गांव से पलायन कर जाएंगे। लेकिन पुलिस तो जैसे बेशर्मी की चादर ओढ़कर सो गई। जो 17 लोग नामजद कराए गए थे, उनमें से पांच मौके से ही पकड़ लिए गए थे। बाकी 12 में से एक भी अभी तक नहीं पकड़ा गया। ये हैं अरुण, आनंद, टोनी, काला, सुंदर, कल्लू, सचिन, दीपक, संदीप, बेदू, गौरव। इनके अलावा 50 अज्ञात में लिखवाए गए। इनमें से एक की भी पहचान नहीं हो पाई। इनकी गिरफ्तारी के लिए न तो दबिश दी जा रही। न ही इनके घर की कुर्की के प्रयास किए जा रहे। न ही इनकी गिरफ्तारी पर कोई इनाम ही रखा गया है। इससे क्या समझा जाए? कहीं ऐसा तो नहीं कि राजनीति ने पुलिस के हाथ बांध दिए हों?
उधर, थाना प्रभारी का कहना है कि पावला बेगमाबाद के मामले में फरार आरोपियों में से किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस की ओर से प्रयास चल रहे हैं।