बागपत। आईएएस बनना तो बहुत लोग चाहते हैं लेकिन बन कितने पाते हैं? बहुत ऐसे हैं, जो एग्जाम पे एग्जाम दिए जाते हैं लेकिन सपना सच नहीं हो पाता है। आखिर क्यों नहीं मिलती इन्हें कामयाबी? और जो आईएएस बन जाते हैं, उनमें क्या खूबी होती है? इन सवालों के जवाब दिए डॉ. सुधाकर वर्मा ने। उनकी मानें तो इस मुश्किल इम्तिहान को पास करने के लिए कुछ खास नहीं करना पड़ता। कहते हैं ॅमैं तो बस टेंशन फ्री होकर पढ़ता था, इसी से यह कामयाबी मिल गई। ॅ
बागपत सीएचसी पर तैनात वर्मा को आईएएस में 509 रैंक मिली है। उन्होंने बताया कि वे छह घंटे अस्पताल में ड्यूटी देते थे। इसके अलावा कुछ समय क्रिकेट भी खेलते थे क्योंकि उन्हें कभी इस बात को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। बस टेंशन फ्री होकर पढ़ाई करते थे।
उनके पास भूगोल और जंतु विज्ञान विषय थे। भूगोल के बारे में कहते हैं कि यह स्कोरिंग सब्जेक्ट है, इसलिए लिया। लोग कहते हैं कि सुबह को ब्रह्म मुहूर्त में पढ़ने से जल्दी याद होता है। डॉ. वर्मा ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि जब समय मिले, मन लगाकर पढ़ो।
क्या याददाश्त तेज करने के लिए कोई टॉनिक लिया? या ऊर्जा के लिए किसी एनर्जी ड्रिंक का सेवन किया? पूछने पर जवाब मिला, नहीं ऐसा कुछ नहीं। वे बिल्कुल नार्मल डाइट लेते हैं। बागपत में पेइंग गेस्ट के रूप में रह रहे हैं। इसलिए यहीं के खरबूजे-तरबूजे खाकर ही आईएएस बन गए। उनका यह भी कहना है कि डाक्टर होने के नाते उन्हें मालूम है कि ऐसी कोई दवाई नहीं आती, जो दिमाग को तेज कर दे या याददाश्त बढ़ा दे।
-जागरूकता से मिटेगा भ्रष्टाचार
बागपत। डॉ. वर्मा ने बताया कि वे चौथे प्रयास में सफल हुए हैं। इस बार उनसे साक्षात्कार में ज्यादातर सवाल स्वास्थ्य विभाग के बारे में पूछे गए। इसलिए आसान रहा। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार एक ही तरह से मिट सकता है और यह तरीका है लोगों का जागरूक हो जाना। जैसे-जैसे लोग अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे, भ्रष्टाचार कम होता जाएगा।