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विधायक के हंगामे पर मुल्जिम छोड़ा

Baghpat Updated Sun, 02 Jun 2013 05:52 AM IST
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बागपत। न खाता, न बही, जो विधायकजी कहें, वह सही। बागपत कोतवाली पुलिस ने शनिवार को यही किया। हिरासत में लिया गया जानलेवा हमले की संगीन धारा का नामजद आरोपी रालोद विधायक के हंगामा करने पर थाने से छोड़ दिया गया। इस मामले को लेकर सपा और रालोद नेताओं में काफी तनातनी भी हुई।
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बरवाला गांव के प्रॉपर्टी डीलर यशपाल उर्फ पप्पू पर 29 मई की रात गुफा बाबा मंदिर के पास हमला हुआ था। उसके ड्राइवर सोमपाल को चाकू मारकर घायल कर दिया गया था, इसमें किसान मजदूर उत्थान समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र उर्फ मुनेश बरवाला, उसके दो भाई महिपाल और प्रमोद तथा भतीजा राहुल नामजद कराए गए थे। एफआईआर जानलेवा हमले की धारा 307 में हुई। पुलिस ने प्रमोद को हिरासत में ले लिया। इसका पता चलने पर प्रमोद की हिमायत में मुनेश बरवाला को साथ लेकर छपरौली के रालोद विधायक वीरपाल राठी बागपत कोतवाली पहुंचे। पप्पू की ओर से छपरौली की सपा ब्लॉक प्रमुख वीरवती का बेटा परमवीर तुगाना पहुंच गए। दोनों ओर के समर्थक कोतवाली में जमा हो गए। विधायक ने कहा कि प्रमोद बेकसूर है और मुकदमा फर्जी है। परमवीर ने कहा कि हमला प्रमोद ने ही किया है। दोनों में तनातनी हुई। इस पर पहले पुलिस सपा नेताओं की ओर इतनी झुकी कि मुनेश बरवाला को भी हिरासत में ले लिया।
इस पर विधायक ने हंगामा कर दिया तो पुलिस के होश उड़ गए। थोडी़ देर सपा और रालोद नेताओं में तनातनी चली। एसओ के दफ्तर के बाहर दोनों के समर्थकों ने हंगामा किया। इसके बाद एसओ ने विधायक की मान ली और प्रमोद तथा मुनेश बरवाला को छोड़ दिया। विधायक दोनों को अपने साथ लेकर चले गए।
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------------------इंसेट...............
... तो फिर से कर लेंगे गिरफ्तार
-कोतवाली प्रभारी मुनेंद्र सिंह का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच फैसले की बात चल रही है। उनकी सहमति पर मुल्जिमों को दो दिन के लिए छोड़ा गया है। यदि उनके बीच फैसला नहीं होता है तो मुल्जिमों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
-हमले की घटना फर्जी
विधायक वीरपाल राठी का कहना है कि यह घटना पूरी तरह से फर्जी है। किसान नेता मुनेश व उसके परिवार के लोगों को झूठे केस में फंसाने की यह साजिश है। निष्पक्ष जांच में यदि यह घटना सही पाई गई तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।


कौन देगा उत्तर
-अगर घटना फर्जी है तो पुलिस ने एफआईआर एक्सपंज क्यों नहीं की?
-अगर फर्जी केस दर्ज कराया गया है तो आरोपी को हिरासत में क्यों लिया?
-विधायक के कहने पर आरोपी छोड़ने का अधिकार पुलिस को किसने दिया?
-अगर सही-गलत का फैसला एमएलए करेंगे तो पुलिस जांच की जरूरत क्या है?
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