बागपत। पश्चिमी यूपी की राजनीति में अहम किरदार निभाने वाली जाट बिरादरी को रालोद का वोट बैंक कहा जाता है, लेकिन इस बार छोटे चौधरी को यह बड़ी ताकत पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा। कारण बाकी दल जाट वोटरों में सेंधमारी की तैयारी में लग गए हैं। इसके चलते रालोद मुखिया पर जाटों को केंद्र में आरक्षण दिलाने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
आंदोलन की राह पर चल रहे जाटों की यह मुराद अगर चुनाव से पहले पूरी नहीं हो पाती है तो जवाब नागर विमानन मंत्री चौधरी अजित सिंह को ही देना होगा। जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने एक बार फिर केंद्र सरकार की नाक में दम करने की तैयारी शुरू कर दी है।
समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि मानसून सत्र में फिर से आंदोलन चलाया जाएगा। इस बार भी दिल्ली में सरकार से जुड़े नेताओं के घर हंगामा होगा। अगर लोकसभा चुनाव से पहले जाटों को केन्द्र में आरक्षण नहीं मिला तो कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के नेताओं को गांवों में घुसने नहीं दिया जाएगा।
130 सीटों पर है जाट निर्णायक - यशपाल
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि लोकसभा की 130 सीटों पर जाट वोटर निर्णायक भूमिका में है। इन सभी सीटों का ब्योरा कांग्रेस और भाजपा नेताओं को दिया जा चुका है। इनमें यूपी की 25 सीटें हैं।
हमारा वोटर हमारे साथ - मुन्ना
रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान का कहना है कि रालोद का वोटर पूरा पूरी तरह रालोद के साथ है। किसान उसके साथ रहते हैं, जो उनके हक की लड़ाई लड़े। मंत्री बनाने या पद देने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।