बागपत। न्यूज चैनल के एग्जिट पोल ने बागपत से अजित सिंह और मथुरा से जयंत चौधरी पर हार का खतरा बताकर रालोद नेताओं को बड़ी जोर का झटका दिया है। अभी तक तो बहस का मुद्दा सिर्फ यही बना हुआ था कि बागपत से अजित सिंह और सत्यपाल सिंह में कौन जीतेगा। लेकिन अब चर्चा इस पर भी होने लगी है कि रालोद का खाता खुल भी पाएगा या नहीं। भाजपाई तो पहले से ही दावा कर रहे हैं कि नतीजे 1998 जैसे होंगे।
अजित सिंह के लिए सबसे मुश्किल समय 1998 का ही रहा था। उन्होंने 1996 में पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था लेकिन थोडे़ ही दिन में अलग होकर भारतीय किसान कामगार पार्टी बना ली थी। इसके चलते 1997 में बागपत सीट पर उप चुनाव हुआ था। इसमें अजित सिंह जीत गए थे। इसके बाद भाकिकापा ने पहला चुनाव 1998 में लड़ा। इसमें कहीं भी जीत नहीं मिली। अजित सिंह को भी हार का मुंह देखना पड़ा।
इसके अगले ही चुनाव में 1999 में अजित सिंह ने भाकिकापा का नाम बदलकर राष्ट्रीय लोकदल कर दिया। रालोद के सिंबल हैडपंप पर अजित सिंह ने खुद एक भी चुनाव नहीं हारा है लेकिन एग्जिट पोल बता रहे हैं कि इस बात उनकी जीत मुश्किल लग रही है। एक न्यूज चैनल ने तो यहां तक कह दिया है कि जयंत चौधरी पर भी हार का खतरा है। इसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर अजित सिंह और जयंत चौधरी की सीट इतनी बुरी तरह से फंसी है तो फिर रालोद का कौन सा प्रत्याशी जीत पाएगा।
कांग्रेस से गठबंधन में रालोद ने इस बार आठ सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए। इनमें बागपत से अजित सिंह, मथुरा से जयंत चौधरी, बिजनौर से जया प्रदा, फतेहपुर सीकरी से अमर सिंह, बुलंदशहर से अंजु मुस्कान, अमरोहा से राकेश टिकैत और हाथरस से नरेश धनकर शामिल हैं। बागपत के रालोदिए अजित सिंह और जयंत चौधरी का नतीजा जानने को बेकरार हैं।
कब कितने सांसद
:: 2009 : भाजपा से गठबंधन था। सात सीटों पर उम्मीदवार उतारे। पांच पर जीत मिली।
:: 2004 : सपा के साथ गठबंधन था। बागपत, कैराना और बिजनौर सीट जीती थी।
:: 1999 : रालोद के दो ही सांसद बने। बागपत से अजित और कैराना से अमीर आलम जीते थे।
:: 1998 : तब पार्टी भाकिकापा थी, खाता नहीं खुला था, अजित सिंह भी हारे थे।
:: 1996 : पार्टी का विलय कांग्रेस में हो गया था, अजित सिंह कांग्रेस के टिकट पर जीते थे।
:: 1991 : अजित सिंह ने 1989 और 1991 के चुनाव जनता दल में रहकर लड़े।
पांच सीटों पर है संभावना : मुन्ना
:: रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान का कहना है कि बागपत से अजित सिंह और मथुरा से जयंत चौधरी की जीत तो एकदम पक्की है। इनके अलावा कैराना समेत तीन और सीटों पर जीत की संभावना है।
:: हर बार की यही कहानी : गठीना
रालोद मंडल अध्यक्ष सुखवीर सिंह गठीना का कहना है कि 2009 के चुनाव में भी मीडिया ने इसी तरह से चौधरी अजित सिंह पर हार का खतरा होने के दावे किए थे, लेकिन जीत उनकी ही हुई। ऐसे ही इस बार होगा।
:: गलत साबित होगा सर्वे : अनिल जैन
रालोद जिलाध्यक्ष अनिल जैन का कहना है कि बागपत लोकसभा सीट पर न्यूज चैनलों का एग्जिट पोल गलत साबित होगा, यहां चौधरी अजित सिंह की जीत में कोई संशय नहीं है।