छपरौली (बागपत)। एक थप्पड़ के बदले दो भाइयों का खून... जी हां। यही है रठौड़ा के डबल मर्डर की कहानी। ऊधम करनावल गैंग के शूटर मनीष बावली उर्फ अन्ना का दो भाइयों मुकेश और विकास उर्फ मोनू के साथ झगड़ा हुआ था। इसमें मोनू ने उसे एक थप्पड़ मार दिया। तभी से उसने दोनों के मर्डर की ठान ली। एक बार मोनू पर चाकू से हमला किया। इसमें वह बच गया। अन्ना को जेल जाना पड़ा। शातिर अपराधी ने साजिश के तहत जानलेवा हमले के मामले में समझौता कर लिया था, लेकिन मन से रंजिश नहीं निकाली। अब दोनों का खून कर दिया।
पुलिस ने बताया कई साल पहले अन्ना और मोनू दोस्त हुआ करते थे। दोनों के घर आमने- सामने हैं। अन्ना अपने मामा जुगमिन्दर, मूरत उर्फ देवेंद्र, सोराज और गिरिराज के पास बचपन से रहता है, लेकिन जब से उसने अपराध की राह पकड़ी, मोनू ने दोस्ती तोड़ दी। तीन साल पहले की बात है।
उसने एक दिन विकास और मोनू से उनकी बाइक मांगी, उन्होंने उसे मना कर दिया। दोनों भाई किसान हैं। अपराधी से वास्ता रखना गलत समझते थे। लेकिन अन्ना इसे दिल पर ले गया। लड़ने-झगड़ने लगा। इस झगड़े में उसे एक थप्पड़ लग गया। उसने तभी कह दिया कि इसका बदला खून से लेगा। थोड़े ही दिन बाद उसने मोनू पर चाकू से हमला कर दिया। मोनू की जान जाते जाते बची। इसमें अन्ना को जेल जाना पड़ा। जमानत का कोई रास्ता नहीं निकल रहा था। तब उसने चाल चली। उसके रिश्तेदारों ने दोनों भाइयों से समझौते की गुजारिश की। इसके बाद उसकी जमानत हो गई। बाद में दोनों पक्षों की मीटिंग में समझौता हो गया। दोनों भाइयों ने समझा कि अब कोई गिला-शिकवा नहीं, डरने की कोई बात नहीं लेकिन अन्ना कहां मानने वाला था। मृतकों के तीसरे भाई सोनू ने बताया समझौते के बाद उससे कभी कोई बात नहीं हुई। वह तीन साल पहले झगड़े को ही दिल से लगाए बैठा था। इसमें उसने दोनों भाइयों का खून कर दिया।