बहराइच। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र की सीमा नेपाल और लखीमपुर खीरी जिले से सटी हुई है। दोनों जिलों के जंगलों में विहार करते हुए वन्यजीव अक्सर आते जाते हैं। इन वन्यजीवों पर भी अब वन महकमा नजर रखेगा। इसके लिए थर्मो सेंसर कैमरे की मदद ली जाएगी। पहली बार खाता कॉरीडोर क्षेत्र में चहलकदमी करने वाले बाघ, तेंदुए, गैंडे और हाथी की गिनती भी होगी। यह रिपोर्ट पर्यावरण निदेशालय को
भेजी जाएगी।
बहराइच के पश्चिमी हिस्से में कतर्नियाघाट संरक्षित वन प्रभाग है। इस वन प्रभाग की सीमा नेपाल और लखीमपुर खीरी जिले से सटी हुई है। सीमा के उस पार नेपाल में रायल बर्दिया नेशनल पार्क का जंगल है तो दूसरी ओर लखीमपुर का दुधवा नेशनल पार्क। दोनों जंगलों के बीच का परिक्षेत्र खाता कॉरीडोर कहलाता है। इस क्षेत्र से होकर जंगलों के बीच दुर्लभ वन्यजीवों का आवागमन होता है। अक्सर कॉरीडोर क्षेत्र में शिकारी दुर्लभ वन्यजीवों पर शिकंजा कसने का प्रयास करते हैं। कॉरीडोर क्षेत्र में वन्यजीवों को शिकारियों के चंगुल से बचाने के साथ ही दोनों जंगल के बीच अधिक से अधिक चहलकदमी करने वाले बाघ, तेंदुए, गैंडे, हाथी की गणना की रूपरेखा तैयार की गई है। डब्लूूडब्लूूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि नेपाल के डब्लूूडब्लूूएफ के अधिकारियों से बात की गई है। खाता कॉरीडोर के भारतीय क्षेत्र में वन और डब्लूूडब्लूूएफ की ओर से थर्मो सेंसर कैमरे लगाए जाएंगे, जबकि नेपाल में रायल बर्दिया नेशनल पार्क की ओर से कैमरों की व्यवस्था की जाएगी। 70 से अधिक कैमरे लगेंगे। उधर, लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क और कतर्निया के बीच स्थित खाता कॉरीडोर क्षेत्र में भी 50 कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की मदद से वन्यजीवों के मूवमेंट का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मामले में नेपाल और खीरी के वनाधिकारियों से दो चरणों में वार्ता हो चुकी है। दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में पुन: बैठक होनी है, जिसमें योजना को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।