बलिया। हुदहुद तूफान का असर जनपद में सोमवार का दिखाई दिया। 36 घंटे से लगातार हो रही बारिश ने नगर को नरक बना दिया है। जगह-जगह जलजमाव से लोगों का चलना दूभर हो गया है। उधर, बारिश किसानों पर कहर बनकर टूट रही है। खासकर मक्के की फसल, धान, सब्जी की खेती को भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में किसान काफी परेशान हैं। जानकारों की माने तो रविवार की शाम से हो रही लगातार बारिश मक्के की फसल को भी नष्ट करसकती है। ज्यादातर किसान मक्के को काटकर मड़ाई के लिए रखे हैं और कुछ मड़ाई करके सूखाने के लिए। ऐसे में दाने और बाल में सड़न पैदा होने की संभावना बढ़ गई है। वहीं, जनपद में तेज हवा के साथ बारिश होने से धान की फसल भी जमीन पर गिर गई है।
नगर में एनएच-31 पर बहेरी कटहरनाला के पास, कदम चौराहा, मालगोदाम रोड, जिला अस्पताल, बीएसए कार्यालय सहित अन्य मार्गों तथा सरकारी दफ्तरों में जलजमाव की स्थिति हो गई है। शहर में पहुंचे लोगों को कीचड़ व पानी के बीच से होकर निकलना पड़ा। नरहीं प्रतिनिधि के अनुसार बारिश ने धान, बाजरा की खेती को प्रभावित तो किया ही है। लेकिन किसानों को आशंका है कि तूफान थोड़ा भी उग्र रूप अख्तियार किया तो तैयारी हो रही फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। नरहीं के किसान राजेंद्र राय ने बताया कि इलाके में अधिकांश जगह चित्रा नक्षत्र बीतने के बाद ही रबी की बुआई की जाती है। रामपुरकोड़हरा प्रतिनिधि के अनुसार किसान सूचित यादव, दशरथ यादव, विजय बहादुर सिंह, मनोज सिंह आदि ने बताया कि बारिश से फसलों की क्षति हुई है। मक्के की फसल को काटकर मड़ाई के लिए रखे बाल सड़ने लगा है। वहीं तेज हवा से धान की फसल भी जमींदोज हो गई है। सब्जी की फसल भी काफी क्षतिग्रस्त हुई है। किसानों ने शासन से हुए नुकसान के जायजा लेकर मुआवजा देने की मांग की है। बांसडीहरोड प्रतिनिधि के अनुसार रविवार की शाम से हुई बारिश किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। खेतों में बंधे मक्के का बोझ सड़ने की कगार पर पहुंच गया है। किसी तरह किसान मक्के का बोझ बचाने की जुगत में है। बेल्थरारोड प्रतिनिधि के अनुसार मौसम में आए अचानक परिवर्तन से ठंड ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। रबी की बुआई के लिए किसान खेत को तैयार कर रहे हैं।