बलिया (ब्यूरो)। शहर के एनसीसी तिराहे के समीप सेठ कालोनी स्थित प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र पर जगदंबा सरस्वती जिनको प्यार से सभी मम्मा भी कहते हैं कि पुण्यतिथि मनाई गई। मम्मा ब्रह्मकुमारी संस्था की प्रथम अंतराष्ट्रीय मुख्य प्रशासिका थी।
इस दौरान मुख्य इंचार्ज बीके उमा दीदी ने यज्ञ माता सरस्वती के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महान तपस्वनी, बालब्रह्मचारी, वीरविरागनी, इच्छाओं के लेश मात्र से ही अविद्या स्थिति वाली सर्वस्व त्यागी नि:स्वार्थ सेवाधारी, सर्वगुणों व सर्वमर्यादाओं से सुशोभित नारी रत्न सरस्वती मां संस्था की स्थापना के समय 1937 में 18 वर्ष की अल्पायु में मानव कल्याण हेतु ईश्वरीय सेवा करने के लिए अपना अखिल जीवन मानव कल्याण हेतु समर्पित कर दिया। संस्था के संस्थापक प्रजापति ब्रह्मा नारी कल्याण के साथ-साथ विश्व कल्याण हो तथा मानव के नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास हो। इसके लिए संस्था की मुख्य प्रशासिका का पद सौंप दिया गया। संस्था में लगभग 350 लोगों का समूह था। जिनको मम्मा ने एक कुंवारी कन्या होते हुए भी ममतामयी मां बन कर योग्य बनाया। दीदी ने कहा कि मम्मा सदा कहती थी कि काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार नरक के द्वार हैं। इस लिए मानव को कभी क्रोध में आकर अपना आपा नहीं खोना चाहिए। बल्कि परमात्मा को अपने मनबुद्धि से याद कर मन के इस विष को नष्ट कर देना चाहिए। जिससे खुद सुखी होवें और दूसरों को सुख दे सकें। इस अवसर पर बीके सुमन, बीके सुरेश, बीके विनोद सहित सैकड़ों भाई-बहनें मम्मा को स्मृति कर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।