नगरा। नगरा विकास खंड के एक दर्जन गांवों में डायरिया का प्रकोप जारी है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. पीके सिंह के दौरे के बाद भी महकमे के चिकित्साधिकारियों की ओर से रोकथाम के लिए कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। पीड़ितों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सरकारी दवाएं नहीं मिलने से वे बाहर की दवाएं खरीदने को विवश हैं। सरकारी उपेक्षा के चलते वे पीएचसी पर इलाज करना भी मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। इससे गुरुवार को मरीजों से पटे चिकित्सालय में शुक्रवार को सिर्फ दो मरीज दिखे। शनिवार को भी अस्पताल परिसर में दो मरीज ही नजर आए।
ब्लाक मुख्यालय से सटे ढेकवारी, इंदासो, जेठवार, निकासी, रनऊपुर, डिहवा, देवरिया, सुजनापुर, परसिया, ताड़ीबड़ागांव, कोठिया, कमरौली, छितौना, नगरा, निकासी, बिष्णु, बरहमनिया आदि गांवों में डायरिया ने तीन दर्जन से अधिक लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। डिहवा गांव में बुद्धवार की रात दादी और नातिन की मौत इलाज के अभाव में हो गई। इन दोनों के मौत के बाद स्वास्थ्य महकमे के आलाधिकारियों के कान खड़े हुए और मुख्य चिकित्साधिकारी डा. पीके सिंह सदलबल गुरुवार को डिहवा पहुंच गए। उनके डिहवा पहुंचते ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरीजों से पट गया। वहीं दूसरे दिन शुक्रवार को सीएचसी खाली हो गया। पीड़ितों का कहना था कि अस्पताल में किसी चीज की सुविधा नहीं है। सभी दवाएं बाहर की लिखी जा रही हैं। सीएमओ के दौरे के बाद भी स्वास्थ्य महकमे पर कोई असर नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चिकित्सकों एवं अधिकारियों की स्थिति यह है कि वे डायरिया प्रभावित गांवों में जाने से कतराने लगे हैं। सर्वाधिक डायरिया से पीड़ित गांव डिहवा के प्रधान शेरबहादुर ने बताया कि स्वास्थ्य महकमे की तरफ से पीड़ितों की मदद संतोषजनक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग का रवैया उदासीन बना हुआ है। पीड़ित गांव के चट्टी चौराहों पर अपना इलाज करा रहे ह