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लंका जाते वक्त सभी को किया परास्त

Ballia Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
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बलिया। शहर के कदम चौराहा, भृगु आश्रम व रामलीला मैदान में मंचन के दौरान कलाकारों द्वारा भगवान राम के विभिन्न रूपाें को दर्शाया गया। इस दौरान रामलीला कमेटी के मंच से हनुमान द्वारा लंका दहन आदि का मंचन बखूबी किया गया। इस दौरान दर्शकों ने खूब आनंद उठाया।
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रविवार को भक्त हनुमान राम की अंगूठी लेकर समुद्र के रास्ते सीता मइया को पता लगाने चल दिए। लंका जाते वक्त समुद्र के बीच में सुरसा नामक राक्षसी से मुलाकात होती है। उसने हनुमान को रोकने के लिए हर प्रयास किया लेकिन हनुमान ने उसे परास्त कर लंका की ओर प्रस्थान किया। भक्त हनुमान जैसे ही लंका के द्वार पर पहुंचते हैं, वैसे ही गेट पर एक राक्षसी से मुलाकात होती है। इस दौरान दोनों में युद्ध होता है और हनुमान उसे भी परास्त कर लंका में प्रवेश करते हैं। लंका में देखा कि माता सीता अशोक के पेड़ के नीचे बैठी हुई हैं। तभी पेड़ पर बैठे हनुमान राम द्वारा भेजी गई अंगूठी नीचे गिराते हैं। पति राम की अंगूठी देख माता सीता रोने बिलखने लगीं। इसी बीच यह देख हनुमान सीता के सामने पेड़ से उतर कर आते हैं। सीता मइया ने उनका परिचय पूछा जिस पर हनुमान ने बताया कि मैं प्रभु श्रीराम का भक्त हूं। मैं आपका पता लगाने व साथ ले जाने आया हूं। सीता ने कहा कि जब राम आएंगे और रावण से युद्ध कर उसे मार मुझे ले जाएंगे। इसी बीच हनुमान को भूख लगती है और माता सीता से आज्ञा लेकर वाटिका में फल तोड़ खाने लगते हैं। इस दौरान किसी राक्षस की नजर हनुमान पर पड़ती है और वह तुरंत रावण से जाकर कहता है। जिस पर रावण का पुत्र मेघनाद क्रोधित होकर वाटिका में आता है और हनुमान को पकड़ उसे मार देने का आदेश देता है। तभी विभीषण ने कहा कि वानर को मारना ठीक नहीं है उसके पूंछ में आग लगाकर जला दिया जाए। विभीषण की यह बात सुन मेघनाद ने हनुमान के पूंछ में आग लगवा दी। पूंछ में आग लगते ही हनुमान ने पूरे लंका को जला दिया। चारों तरफ हाहाकार मच गया।
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