बलिया। राधाकृष्ण लंबरदार पुस्तकालय एवं वाचनालय के लोकार्पण के मौके पर सोमवार को राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन बसंतपुर गांव में किया गया। जिसमें जिले के साथ ही प्रदेश के कोने-कोने से आए रचनाकारों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप्र कांग्रेस कमेटी के सचिव राजीव उपाध्याय रहे। उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित एवं पुष्प अर्पित कर पुस्तकालय व वाचनालय का लोकार्पण किया। कुशीनगर से पधारी कवियत्री माधुरी सिंह मधु ने सरस्वती वंदना के बाद अपनी कविता ‘वेदना से वेदना का त्राण होता है, जीव से हर जीव का कल्याण होता है’ सुनाकर महफिल में ताजगी भरने का काम किया। इसके बाद बिहार के गोपालगंज के कवि एवं गीतकार संजय मिश्र संजय अपनी रचना ’गजल गीतों का लेकर हार आया हूं, अदब का एक हसीं संसार लाए हूं’ सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। बस्ती के शायर फिरोज अश्क ने गाया कि ‘वतनपरस्त हूं मर जाऊ जब वतन के लिए मेरे कफन पर अजीजे हिंदुस्तान लिख देना’ सुनाकर भारत के आजादी के जुल्मों की याद ताजा कर दी। आजमगढ़ के ईश्वरचंद्र त्रिपाठी ने‘अपने होठों को सी लिया हमने जहर मिला था पी लिया हमने’ सुनाकर समाजिक रूढ़ियों को तोड़ने के रास्ते में आने वाले कष्ट की मर्मिक पीड़ा बयां की। संचालक मिथिलेश गहमरी ने अपनी रचना ‘धरती पर जलाओं कि गगन में करो रौशन, नफरत के चिरागों से उजाला नहीं होता’, हास्य कवि कुशीनगर से पधारे बादशाह तिवारी ने जातिवाद संप्रदायवाद परिवारवाद ‘वाद से बाद में विवाद होना वाला है ’, देवरिया के वयोवृद्ध कवि कुबेरनाथ मिश्र विचित्र ने अपनी रचना ‘कौन किसको पूछता है इस जमाने में, माफिया हैं कुर्सियों पर संत थाने में ’सुनाया। स्थानीय कवि शशि प्रेम देव ने रब ही जाने कब बदलेगी अपनी चाल चलन दुनिया, दाउद को भाई कहती है भाई को दुश्मन दुनिया। प्रसिद्ध भोजपुरी कवि बृजमोहन अनारी ने अपने सोहर ‘चह-चह कइली चिरइया, गइया हुकुर देहली हो, आहे विहसल पेड़ के पतईया मड़इया अंजोर भई हो’ सुनाया। इस मौके पर कला शिक्षक डा. इफ्तेखार खां लंबरदार सम्मान एवं डा. एसएन पांडेय को सैन्यू बाबा सम्मान सेे सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिगर बलियावी, मदन, डा. जनार्दन राय, जितेंद्र राय, सुदर्शन सिंह, अश्वनी, राजेंद्र, उमेश, विशिष्ट सिंह, वामदेव, चिंतामणि आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता सुदेश्वर अनाम एवं मिथिलेश गहमरी ने किया। स्वागत ग्राम प्रधान नित्यानंद मिश्र एवं विनायक शरण सिंह ने आभार प्रकट किया।