बलिया। सोमवार को भोर से हुई झमाझम बरसात से खेत में खड़ी और कटी फसल बर्बादी के कगार पर है। किसानों की मानें तो गेहूं, चना, मसूर की पकी फसल आधे से अधिक बर्बाद हो चुकी है। रविवार की मध्य रात्रि के बाद से सोमवार को दोपहर तक बरसात से अब किसान पूरी तरह से तबाह होते नजर आ रहे हैं।खेत व खलिहान में रखी गई फसलों के बोझ भीग जाने से किसानों को अब यही डर सता रहा है कि उनके अनाजों का सड़ना और अंकुरित होना तय है। उधर बेमौसम बारिश से जगह-जगह जलजमाव से मार्ग की दशा नारकीय हो गई है। इससे पैदल और दो पहिया से चलने वाले राहगीरों को काफी फजीहत का सामना करना पड़ा। सोमवार को हुई बरसात के चलते नगर सहित ग्रामीण इलाकों के अधिकांश विद्यालय बंद रहे। ऐसे में दिन भर बच्चे घरों में दुबके रहे।
रविवार को हुई भारी बारिश से क्षेत्र के लगभग 30 प्रतिशत किसानों की खड़ी फसलें और बोझ बंधी गेंहू की फसल पूरी तरह भीग गई। तीन सप्ताह पूर्व से चल रही पछुआ हवाओं के झोंकों के चलते गेंहू की फसल बिना पुष्ट हुए ही पक गई जिसे मजबूरन हर्वेस्टर से काटनी पड़ी। बड़े किसानों को इस कार्य में सफलता मिल गई, लेकिन छोटे किसानों का 30 प्रतिशत फसल अभी भी खेत की कटाई और फसलों की मड़ाई से वंचित है।इसी बीच रविवार को दोपहर के बाद बरसात शुरू हो गई। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं हैं।
रामपुर कोड़हरा संवाददाता के अनुसार बारिश की वजह से वातावरण में नमी तो आई है , लेकिन किसानों के लिए यह बारिश आफत साबित हो रही है। खेतों और खलिहानों में काटकर रखी फसलें भीगने से किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं। मजदूरों के अभाव के चलते बहुत से किसान फसलों की कटाई करके बोझ बंधाकर खेतों में ही रख दिए थे। रविवार की शाम से ही तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। जिससे खेतों में काट कर रखे गए सैकड़ों किसानों के सरसों, गेंहू, चना, मसूर की फसलें भीग गईं। किसानों को डर है कि भीगी हुई फसलें कहीं अंकुरित न हो जाए या उसमें सड़न न आए जाए। रसड़ा संवाददाता के अनुसार रविवार से मौसम के अचानक करवट लेने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मड़ाई की सारी तैयारियों पर मौसम ने पानी फेर दिया। हनुमानगंज प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के 40 फीसदी किसान अपनी फसल काटने के बाद खेतों में बोझ बांधने का काम शुरू किए थे कि इसी बीच रविवार को हुई झमाझम बारिश से सारा बोझ भीग गया है। किसानों को अब यही चिंता सता रही है कि कहीं उनकी फसल सड़ न जाए।