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श्रीकृष्ण जन्म व गोवर्धन पूजा का वर्णन किया

Banda Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
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बांदा। गीता संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथा व्यास ने नंद घर उत्सव और श्रीकृष्ण द्वारा राक्षसों के वध का प्रसंग सुनाया। कालिया नाग और गोवर्धन पूजा का वर्णन किया।
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जहीर क्लब में बुधवार को कथा सुनाते हुए कथाव्यास आचार्य महावीर द्विवेदी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म होने पर नंद ने गाएं और सोना चांदी दान दिया। महिलाओं ने बधाई गीत गाए। कृष्ण जन्म की खबर मिलने पर कंस ने छह माह तक उम्र के सभी बच्चों का वध करने का आदेश दिया। पूतना राक्षसी ने विषपान के जरिए श्रीकृष्ण को मारना चाहा। श्रीकृष्ण ने स्तन पान कर उसके प्राण हर लिए। ग्वाल-बालों के साथ गाय चराते समय सकठासुर, अघासुर और बकासुर के वध का वर्णन किया। माखन चोरी प्रसंग सुन श्रोता भाव विभोर हुए।
ग्वालबालों के साथ यमुना किनारे खेलते समय गेंद कालिय दह में चली गई। यहां कालिय नाग के विष से घाट का पानी तक जहरीला हो गया था। भगवान श्रीकृष्ण गेंद लेने यमुना में कूद गए और कालिय नाग के फन पर खड़े होकर नृत्य करने लगे। भगवान को पहचान नाग कन्याओं ने उनकी स्तुति की। कालिय नाग क्षमा मांगते हुए वहां से चला गया। श्रीकृष्ण गेंद लेकर बाहर निकले तो ग्वाल-बाल आश्चर्य में पड़ गए। गोवर्धन पूजा प्रसंग में बताया कि बृजवासियों द्वारा गोवर्धन पूजा से नाराज इंद्र ने मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। भगवान श्रीकृष्ण ने उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर बृजवासियों को डूबने से बचा लिया।
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